प्रखर राजनेता व प्रशासक

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illustration: Sushil Doshi
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
अरुण जेटली प्रखर राष्ट्रवादी थे। वैचारिक आधार पर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपना मुकाम बनाया। राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर उनके विचार ध्यान आकृष्ट करने वाले होते थे। छात्र जीवन से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले अरुण जेटली कई उतारों चढ़ाव देखे। आपात काल में उन्नीस महिने जेल में रहे। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह वित्त, रक्षा एवं सूचना प्रसारण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला। सभी रूपों में अपने दायित्व का बखूबी निर्वाह किया।
 कई वर्ष तक राज्यसभा नेता प्रतिपक्ष रहे थे। तब भाजपा का सँख्याबल कम था, लेकिन अरुण जेटली के विचार सत्ता पक्ष को परेशान करते थे। उनके सटीक तर्कों का यूपीए सरकार के पास जबाब नहीं होता था। कानून, संविधान, संसदीय कार्यवाही के नियम को उनको गहरी जानकारी थी। इसी कारण पक्ष और विपक्ष दोनों में उनका सम्मान था। चार दशक से अधिक के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कभी भी मर्यादा और राजनीतिक शुचिता का उल्लंघन नहीं किया। इसी के बल पर राजनीति में शून्य से शिखर तक का सफर तय किया।
वह बहुत व्यस्ताओं के बाद भी नियमित ब्लॉग लिखते थे। मीडिया के साथ साथ सामान्य लोगों में उनके ब्लॉग चर्चा का विषय बनते थे। समय-समय पर विविध मुद्दों पर उनके तर्कसंगत लेख उस मुद्दे पर लोगों को एक नयी दृष्टि प्रदान करते थे। लोकसभा चुनाव के समय अस्वस्थ होने के बावजूद वह आमचुनाव में सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष की नाकामियों को उजागर करते रहे। अभी कुछ दिनों पहले जब अनुच्छेद तीन सौ सत्तर की समाप्ति के समय वह गंभीर रूप से बीमार थे। लेकिन तब भी उनकी राष्ट्रीय चेतना जागृत थी।
उन्होंने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक और देशहित में बताया। संसद में सरकार को जो भारी समर्थन मिला, आमजन ने जिस प्रकार इसका स्वागत किया, उससे अरुण जेटली को बहुत सन्तोष मिला था। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जब अरुण जेटली वित्त मंत्री थे। तब आर्थिक सुधारों से सम्बंधित कई साहसिक निर्णय लिए गए। इन निर्णयों में अरुण जेटली की अग्रणी भूमिका थी। नोटबंदी और जीएसटी को लागू करने में जेटली बड़ा योगदान था। दलगत मतभेदों के बीच राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सहमति बनाने में वह माहिर थे। इसके अलावा पार्टी लाइन का निर्धारण और उसे प्रभावी तरीके से उठाना भी उन्हें बखूबी आता था।
संवेदनशील व विवादित विषयों पर उनके विचार बहुत तर्कसंगत होते थे। इससे किसी का भावना आहत भी नहीं होती थी। पार्टी और देश दोनों का हित भी संरक्षित होता था। कठिन दौर में भी वह भाजपा के लिए प्रभावी रणनीति बना लेते थे। जब बिहार में एनडीए गठबंधन में सीटों को लेकर एक राय नहीं बन पा रही थी, तब यह मोर्चा जेटली ने संभाला। इसके बाद आसानी से सहमति बन गई। जीएसटी पर राष्ट्रीय सहमति बनाना उनकी कुशलता की बानगी थी। राफ़ेल पर विपक्ष की निराधार प्रचार नीति को जेटली ने निरर्थक बना दिया था। इसी प्रकार यूपीए सरकार गुजरात की तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार को अपदस्त करने के लिए जमीन आसमान एक कर रही थी, उस समय अरुण जेटली उनके सभी तीरों को विफल करते जा रहे थे। यही कारण था कि यूपीए सरकार अपने मकसद में सफल नहीं हो सकी।
निधन के बाद अरुण जेटली की संवेदनशीलता का प्रसंग सामने आ रहा है। जिसे उन्होंने सदैव छिपा कर रखा था। वह विद्यार्थी जीवन से ही आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता करते आ रहे है। रजत शर्मा की फीस भरकर उन्हें आगे पढ़ने का मौका देने वाले अरुण जेटली ही थे। यह कार्य उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय तक जारी रखा।  साथ कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों के बच्चों की फीस तथा अन्य जरूरतें वह पूरी करते थे। इतना ही नहीं उनके पास कोई गरीब पहुंचता था तो वह उसकी सहायता करते थे। इस बात की जानकारी अरुण जेटली के परिवार और सहायता प्राप्त करने वाले परिवार को ही रहती थी। अरुण जेटली का पूरा परिवार इसमें उनका सहयोग करता था।
यह अरुण जेटली के बड़प्पन का प्रमाण है कि जिन महंगे स्कूलों में उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाया, उसी में अपने कर्मचारियों के बच्चों को पढ़ने भेजा। पढ़ाई का खर्चा अरुण जेटली स्वयं ने उठाया। कई बच्चों को विदेश पढ़ने भेजा। इन कर्मचारियों के बच्चे आज उच्च पदों पर है। इन सभी के लिए अरुण जेटली को भूलना असंभव होगा। भाजपा भी उनकी कुशलता, प्रखरता को कभी भुला नहीं सकती। राजनीति और समाज जीवन में उनसे प्रेरणा  लेने की आवश्यकता है।

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