UP: गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करना हो रहा है मुश्किल, अभी तक 20.98 लाख मिट्रिक टन ही हो पायी है खरीदारी

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  • गेहूं खरीद का 55 लाख मीट्रिक टन का है लक्ष्य, अभी भंडारण भी हुआ है 17 लाख मीट्रिक टन तक
  • गेहूं का मूल्य बढ़ने की संभावना के कारण किसान सरकारी क्रय केन्द्र की ओर नहीं कर रहे रूख

 

कुछ तो महामारी के प्रभाव के कारण किसान क्रय केन्द्र पर जाने से बच रहे हैं और कुछ लोग गेहूं का मूल्य वृद्धि की संभावना के कारण गेहूं अपने घर में ही स्टाल कर दिये। इस कारण इस वर्ष गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल दिख रहा है। इसका अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि 15 अप्रैल से शुरू हुआ गेहूं खरीद में अब तक एफसीआई व अन्य ने 20.98 लाख मिट्रिक टन ही खरीदारी कर पाई है, जबकि लक्ष्य 55 लाख मीट्रिक टन का है। वहीं एफसीआई, सीडब्ल्यूसी और राज्य भंडारण निगम ने मिलकर अब तक 17 लाख मीट्रिक टन भंडारण किया है। इसमें अकेले राज्य भंडारण निगम ने 11.80 लाख मीट्रिक टन अब तक कर चुका है।

इस संबंध में गाजीपुर जिले के किसान शिवमुनी राय का कहना है कि इस वर्ष दुकानदारों द्वारा घर पर आकर खरीदने और सरकारी क्रय केन्द्र पर जाकर बिक्री करने में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। इसके बाद यह डर बना हुआ है कि बाजार जाने पर कहीं कोरोना पाजिटिव से संपर्क न हो जाय। इस कारण लोग घर पर ही रहकर व्यापारियों को बेचने में ज्यादा अच्छा मान रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ लोग क्रय केन्द्रों पर सरकारी तामझाम से बचने के लिए भी लोग दुकानदार को बेच रहे हैं। कई लोगों ने तो इस वर्ष गेहूं इस उम्मीद में नहीं बेचा कि अभी इसका मूल्य में ज्यादा वृद्धि होगी।

वही लखीमपुर के अनिल सिंह राणा का कहना है कि इस साल हर व्यक्ति यह अनुमान लगाकर बैठा है कि महामारी के कारण हर वस्तु का मूल्य वृद्धि होना तय है। इस कारण लोग बिक्री नहीं कर रहे हैं। कुछ इसी तरह का वक्तव्य अमेठी के केके मिश्रा, सुलतानपुर के विजय पांडेय, प्रयागराज के अजीत सिंह के भी थे।

वहीं दूसरी तरफ सरकारी एजेंसिंयों की बात करें तो सबसे ज्यादा भंडारण निगम ने इस कोरोना काल में परिश्रम किया है और लाकडाउन की स्थिति में कर्मचारी अधिकारी दिन-रात लगे रहे। इसका परिणाम है कि सर्वाधिक 11.80 लाख मिट्रिक टन का भंडारण अकेले राज्य भंडारण निगम ने कर लिया है।

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