- उपभोक्ता परिषद ने कहा: नियामक आयोग ने गुपचुप तरीके से पावर कारपोरेशन के दबाव में की बिजली दरों में की भारी बृद्धि
- उपभोक्ता परिषद का ऐलान टैरिफ पर लगेगी रिव्यू याचिका और सड़कों पर होगा संघर्ष
यूपी में उपभोक्ताओं को एक बार फिर बिजली मंहगी का तगड़ा करंट लगा है उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में कहा कि नियामक आयोग ने गुपचुप तरीके से पावर कारपोरेशन के दबाव में की बिजली दरों में की भारी वृद्धि की हम इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे और सड़कों पर इस वृद्धि के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
बता दें कि उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा आज देर शाम गुपचुप तरीके से पावर कारपोरेशन के दबाव में प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की समस्त श्रेणियों में औसत 12 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की है। सब मिलाकर यह कहना उचित होगा कि पावर कारपोरेशन के प्रस्ताव पर आयोग ने थोड़ा कांट छांट कर उसी पर मोहर लगा दी है। जहाॅ रेगुलेटरी सरचार्ज 4.8 प्रतिशत को समाप्त कर दिया गया है, वहीं रेगुलेटरी असेट 11852 करोड़ का उपभोक्ताओं को फौरी तौर पर लाभ न देकर उसके साथ विश्वासघात किया गया।

ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता जो पहले 1 किलोवाट पर 400 रूपया देते थे अब उन्हें 500 रूपया देना पड़ेगा यानी कि 25 प्रतिशत बृद्धि। गाॅव का अनमीटर्ड किसान जो 150 प्रति हार्सपावर अब उसे 170 प्रति हार्सपावर देना होगा यानी कि उसकी दरों में लगभग 14 प्रतिशत की बृद्धि। सबसे बड़ा चैकाने वाला मामला यह है कि शहरी बीपीएल जो अभी तक 1 किलोवाट तक 100 यूनिट तक रू0 3 प्रति यूनिट देता था अब उसे सीमित कर 1 किलोवाट तक 50 यूनिट तक 3 रूपया सीमित कर दिया गया है यानी कि शहरी बीपीएल यदि 100 यूनिट खर्च करेगा तो उसकी दरों में लगभग 36 प्रतिशत से ज्यादा की बृद्धि कर दी गयी है। वहीं ग्रामीण बीपीएल को 100 यूनिट माना गया है यह कैसा टैरिफ है कि गाॅव का बीपीएल 100 यूनिट और शहर का बीपीएल 50 यूनिट। इसी प्रकार प्रदेश के शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग स्लैबवाइज लगभग 12 प्रतिशत की बृद्धि की गयी है। वहीं उद्योगो की दरों 5 से 10 प्रतिशत की बृद्धि की गयी है। उपभोक्ता परिषद पूरे टैरिफ का अध्ययन कर रहा है बहुत जल्द ही नियामक आयोग में एक रिव्यू याचिका दाखिल करेगा और सड़कों पर आन्दोलन का ऐलान करता है, जल्द ही आन्दोलन की रणनीति बनायेगे।

उप्र राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जिस प्रकार से नियामक आयोग ने पावर कारपोरेशन की प्रस्तावित व्यवस्था पर मोहर लगायी है जो पूरी तरह असंवैधानिक है। प्रदेश के 2 करोड़ 70 लाख उपभोक्ताओं के साथ आयोग ने धोखा किया है। जिस प्रकार से आम जनता की सुनवाई में किसानों, ग्रामीणों व घरेलू उपभोक्ताओं ने आयोग के सामने अपनी बात रखी लेकिन आयोग ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जो अपने आप में बड़ा सवाल है।
उपभोक्ता परिषद ने कहा आयोग की टैरिफ बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठना लाजमी है। एक उदाहरण जो पूरी पोल खोल देगा, गाॅव में बीपीएल उपभोक्ता को 1 किलोवाट 100 यूनिट मानकर उनकी दरे रूपया 3 रखी गयी, वहीं शहरी बीपीएल को 1 किलोवाट 50 यूनिट तक सीमित कर दिया गया है। यह कैसे सम्भव है कि गाॅव का गरीब 100 यूनिट और शहर का गरीब 50 यूनिट, इससे आयोग की टैरिफ की पोल खुल गयी है।







