गठबंधन से इनकार के बाद भी कांग्रेस के खिलाफ हमलावर नहीं सपा प्रमुख
उपेन्द्र नाथ राय
राजस्थान के कोटा में बच्चों की मौत पर सवाल पूछे जाने के बावजूद उसको गोरखपुर से जोड़कर यूपी सरकार के खिलाफ बोलना और कोटा पर चुप्पी साध लेना बता रहा है कि समाजवादी पार्टी के मुखिया का कांग्रेस मोह अभी नहीं छूटा। अखिलेश यादव भले यह घोषणा कर चुके हों कि अगले चुनाव में वे किसी पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगे लेकिन अभी कांग्रेस से गठबंधन बनाये रखने की पूरी गुंजाइश छोड़कर चल रहे हैं।
इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार बंशीधर मिश्रा का कहना है कि राजनीति में कभी कुछ कहा नहीं जा सकता, वह भी सपा के बारे में। सपा जब बसपा से समझौता कर सकती है तो वह कांग्रेस में तो हमेशा संभावना तलाशती रहेगी। वह भी इस समय प्रियंका वाड्रा का यूपी में भ्रमण को देखते हुए शायद अखिलेश यादव उसमें संभावना ज्यादा देखने लगे हैं। इसी कारण उन्होंने इस बीच कांग्रेस के बारे में बोलना उपयुक्त नहीं समझा। यहां तक कि कोटा में बच्चों की पर पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवाल को भी कुटनीति के तहत गोरखपुर के बच्चों की मौत की ओर मोड़ दिया।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह राणा का कहना है कि सपा मुखिया द्वारा कोटा मुद्दे पर न बोलना, उनके लिए ही घातक सिद्ध होगा। यह एक संवेदनशील मुद्दा है। इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए लेकिन उन्हें इसमें भी राजनीति दिखने लगी। वे भले ही कांग्रेस की तरफ झुकाव का आमजन को भी एहसास कराना चाह रहे हों लेकिन सीएए के मुद्दे पर मुसलमान हितैशी बनने की कोशिश करना और कोटा मुद्दे पर कांग्रेस पर कुछ भी न बोलना, उनके लिए चुनावी दृष्टि से शुभ संकेत नहीं है।

वहीं ईश्वर शरण डिग्री कालेज के प्राचार्य आनंद शंकर सिंह का कहना है कि सपा हमेशा निम्न स्तरीय कुर्सी की राजनीति करने की कोशिश करती है। उसमें भी मात खाना पड़ जाता है। ऐसा ही इस बार भी हो रहा है। कोटा पर उनके द्वारा न बोला जाना, उनके लिए घातक है। आखिर उसमें किसी एक वर्ग का परिवार तो पीड़ित है नहीं। उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख भी इस समय कोटा में मृत बच्चों के परिजनों को सांत्वना नहीं दे रही हैं। वे कांग्रेस से अपनी दुश्मनी निकाल रही हैं। उन्हें टीस है, अपने विधायकों के कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने कर लेने की। इस कारण वे लगातार कांग्रेस को घेरने की फिराक में हैं। उन्हें यह भी लग रहा है कि प्रियंका वाड्रा उनके ही वोट बैंक पर सेंध लगा रही हैं। इस कारण भी वे कांग्रेस को घेरना चाहती हैं।
इस बीच यह देखने को मिल रहा है कि सपा प्रमुख कांग्रेस के खिलाफ एक लब्ज भी आवाज नहीं निकाल रहे। उनका पूरा जोर भाजपा के विरोध में लगा हुआ है। शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में सपा प्रमुख से पत्रकारों द्वारा कोटा में बच्चों की मौत पर सवाल पूछे जाने के बावजूद उन्होंने उसे गोरखपुर में पिछले वर्ष बीमारी से हुई बच्चों की मौत से जोड़ दिया। कांग्रेस के खिलाफ न बोलकर वे उस मामले में भी भाजपा के खिलाफ ही बोले।







