देश से गद्दारी सबसे बड़ा पाप है

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देश के प्रति सम्मान-समर्पण की बात केवल एक आदर्श वाक्य नहीं वरन यहां रहने वाले सभी लोगों के जीवन की ऐसी सच्चाई है जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। यह जीवन और उसमें होने वाली प्राप्तियां देश के कारण ही हैं जहां की हवा-पानी से लेकर छोटी-बड़ी हर चीज का प्रयोग करके स्वयं को सार्थक सिद्ध करते हैं। ऐसा उपकार न तो कोई किसी पर करने में सक्षम है और न कर सकता है। इस वास्तविकता की पृष्ठभूमि में पिछले दिनों जो कुछ हुआ और आज भी जो कुछ करने के प्रयास हो रहे हैं, उन्हें भर्त्सना योग्य ही माना जायेगा।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इस बारे में बेहद सटीक ढंग से अपनी बात रखते हुए कहते हैं कि देश से गद्दारी सबसे बड़ा पाप है। लखनऊ में एक समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री द्वारा दो बातें प्रमुख रूप से कही गईं जो ध्यान देने योग्य भी हैं। पहली तो यह कि प्राचीन वेद और ढाई-तीन हजार वर्ष पुराने पुराणों में भारत और उसकी सीमा का वर्णन है। दूसरी बात यह कि देश के चुनिंदा शिक्षण संस्थानों में लगने वाले नारे हमें कचोटते हैं कि देश के खिलाफ षडयंत्र किया जा रहा है।

इन दोनों बातों का यहां उल्लेख किये जाने का प्रमुख कारण यह है कि इनमें हमारे देश की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है, किसी तरह का भी संशय नहीं रहता। भारत की प्राचीनता वैसे तो जगजाहिर है लेकिन अगर किसी को इस बारे में किसी तरह का सन्देह हो तो उसे पता लग सकता है कि भारत का यशोगान कबसे हो रहा है। सच तो यह है कि दुनिया में इस समय के तमाम नामचीन देश तब अस्तित्व में भी नहीं आये रहे होंगे जबसे भारत विश्व पटल पर छाया हुआ है।

दूसरी बात यह कि ऐसी वृहद पृष्ठभूमि के देश में जब यहीं के कुछ लोग ऐसे उल्टे-सीधे नारे लगायें जो स्पष्ट रूप से देश और इसकी एकात्मता पर सीधी चोट करते हों तो शायद इससे ज्यादा दुखदायी कुछ और इसलिये नहीं हो सकता क्योंकि ऐसा करने वालों को भी देश खुद में समेटे हुए है। अपने परिवार अपने बच्चे की तरह। यदि कारण खोजने की कोशिश हो कि ऐसा क्यों किया जा रहा है तो इसका भी कोई उचित कारण नहीं मिलता। साफ है कि ऐसी हरकतें केवल तनिक से लोभ के लिये की जाती हैं लेकिन ऐसा करने वाले यह नहीं जानते कि उनकी यह हरकत कितनी दूर तक उनका, अन्य देशवासियों तथा देश का नुकसान कर सकती हैं। अतः जरूरत यह है कि ऐसे तत्वों को पहचाना जाय तथा उनको अधिकाधिक रूप से अप्रभावी बनाया जाय। प्राचीन भारत की शक्ति आज भी दानवों को निष्क्रिय करने के लिये पर्याप्त है। जरूरत केवल उसको अनुभव करने की है।

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