यूपी में डूबी नांव बचाने की तैयारी में कांग्रेस

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file photo

कांग्रेस ने भले ही देश की स्वाधीनता के लिये संघर्ष में भाग लिया हो, उसके बाद करीब सत्तर वर्षों तक देश पर शासन भी किया हो व इस अवधि में उसके सामने कोई दूसरा दल न टिक पाया हो और इस कारण उसे देश के अधिकांश लोगों का पसन्दीदा दल भी माना जाता रहा हो लेकिन पिछले लम्बे समय से राष्ट्रीय स्तर पर और उत्तर प्रदेश में भी यह पूरी तरह पस्त अवस्था में पड़ी है।

मुख्य धारा में आ सकना उसके लिये एक समस्या से कम नहीं है। इसलिये एक समय कांग्रेस पार्टी का अभेद्य गढ़ रहे यूपी के अमेठी शहर में पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि कांग्रेस का फोकस मूल मुद्दों पर होगा। इसके तहत सबसे पहले खेती-किसानी के मसलों पर पार्टी गांवों में किसानों के साथ सीधे संवाद करने के अलावा उनकी मांगों को लेकर बड़ा आन्दोलन छेड़ने जा रही है।

यह अच्छी बात है। अच्छा तो यह होता कि पार्टी किसानों से, उनकी समस्याओं से कभी दूर ही न होती क्योंकि उसके अटूट समर्थकों में इस वर्ग की भूमिका प्रमुख थी। पूर्व में पार्टी के कई प्रमुख और प्रभावशाली नेतागण ग्रामीण पृष्ठभूमि से रहे हैं। ड्राइंगरूम पॉलिटिक्स के प्रभाव में आने के बाद से इस स्थिति में बेहद बदलाव आया।

कम्प्यूटर आने के बाद तो गांवों का जैसे कोई अर्थ ही नहीं रह गया। अब महासचिव के रूप में प्रियंका गांधी पार्टी को गांवों से, वहां के किसानों से जोड़ना चाहती हैं तो इसका मतलब यह है कि इस वर्ग का राजनीति में महत्व समझने लगी हैं। यह ठीक है कि कम्प्यूटर आने के बाद से शहरी वोटर का राजनीति में दखल और बढ़ गया है, युवा भारत की बातें भी की जाती हैं लेकिन इन सबके बीच गांवों और उसके किसानों का महत्व कहीं से कम नहीं हुआ है।

बात केवल समझने की है। कांग्रेस अब इस वर्ग को फिर अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम करने की योजना बना रही है तो यह अच्छी बात है क्योंकि किसानों के लिये अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। बस उनका विश्वास जीतना होगा।

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