डॉ दिलीप अग्निहोत्री
नमामि गंगे परियोजना का मूल भाव पांच दिवसीय यात्रा में रेखंकित हुआ। कानपुर में गंगा यात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री योगी ने अटल घाट पर गंगा आरती और गंगा पूजन किया। बिजनौर और बलिया से पांच दिवसीय गंगा यात्रा प्रारंभ हुई थी। योगी ने कहा कि गंगा यात्रा वस्तुतः मां, माटी और मनुष्यता के महात्म्य को अभिनंदित करने का पुण्य प्रयास है। यह गंगा यात्रा का समापन नहीं बल्कि गंगा युग का प्रारंभ हुआ है। गंगा आजीविका और आराधना के संगम से आकांक्षाओं की पूर्ति मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। चार पुरुषार्थ आदि आधार मां गंगा है। गंगा यात्रा उसी मोक्ष मार्ग के अन्वेषण का एक पड़ाव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी में कहा था कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। वस्तुतः यह कथन उनकी गंगा जी के प्रति आस्था को रेखांकित करने वाला था। इस भावना के अनुरूप गंगा जी मात्र नदी नहीं है, बल्कि उन्हें मां के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। उनको गरिमा के अनरूप रखना सभी संतानों का दायित्व है। इसमें सरकार और समाज के सभी लोग सम्मिलित हैं। पहले सरकारों ने इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। समाज भी इसके प्रति जागरूक नहीं रहा। जबकि पहले गंगा जी मात्रा आस्था की आधार नहीं थी। बल्कि चालीस प्रतिशत से अधिक आबादी का इसी माध्यम से व्यापार भी संचालित होता था। कृषि, पेयजल, पशुपालन आदि लाभ भी इसी से सुनिश्चित होता था। यह वह समय था जब गंगा अविरल निर्मल थी। नरेंद्र मोदी ने जब यह कहा कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है, तभी उनके मन मष्तिष्क में गंगा को निर्मल अविरल बनाने का विचार रहा होगा। पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने नमामि गंगे योजना शुरू की थी।
मोदी सरकार प्रारंभ से ही गंगा जी को अविरल निर्मल बनाने के लिए कटिबद्ध रही है। प्रारंभिक चरण में ऊपरी सतह की सफ़ाई, ठोस कचरे की समस्या का निराकरण, ग्रामीण क्षेत्रों की सफ़ाई, मैले पदार्थ को यहां गिरने से रोकना शौचालयों के निर्माण,ढांचागत निर्माणों का नवीकरण व आधुनिकीकरण बेहतर घाटों के निर्माण, मरम्मत का लक्ष्य बनाया गया। उसपर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ। इसके बाद नदी में नगर निगम और उद्योगों से आने वाले कचरे की समस्या के समाधान पर बल दिया गया। अगले कुछ समय में वर्षों में पच्चीस सौ एमएलडी अतिरिक्त ट्रीटमेंट कैपेसिटी का निर्माण किया जाएगा। प्रयोग किये गए पानी के लिए एक बाजार बनाया जाएगा। औद्योगिक प्रदूषण की समस्या के समाधान हेतु भी कारगर प्रयास चल रहे है। गंगा के किनारे स्थित ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को गंदे पानी की मात्रा कम करने या इसे पूर्ण तरीके से समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन निर्देशों का कार्यान्वयन कर रहा है। सभी उद्योगों को गंदे पानी के बहाव के लिए रियल टाइम ऑनलाइन निगरानी केंद्र स्थापित करना होगा। जैव विविधता संरक्षण,वनीकरण,पानी की गुणवत्ता की निगरानी के प्रयास चल रहे है। तीस हजार हेक्टेयर में वन लगाए जाएंगे। योगी सरकार वृक्ष लगाने का रिकार्ड बना चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की परम्परा पुरुषार्थ चतुष्टय में विश्वास रखती है। धर्म उसका आधार है,अर्थ उसकी दूसरी श्रेणी में आता है। इसके बाद ही कामनाओं की सिद्धि होती है,तभी व्यक्ति को मोक्ष मिलता है। गंगा यात्रा समाज के कल्याण के लिए मां गंगा को उनके पुराने गौरवशाली स्वरूप में वापस लाने का महाअभियान है। यह यात्रा नहीं बल्कि इस बात का संकल्प है। इस यात्रा से लोगों को वही लाभ मिल सकेगा जो आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व गंगा के निर्मल जल के कारण मिला करता था। यह आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ने वाली यात्रा है। योगी सरकार में गतवर्ष प्रयागराज का दिव्य भव्य आयोजन हुआ था।
जिसने विश्व की एक यूनीक इवेन्ट के रूप में अपनी पहचान बनायी। प्रयागराज कुम्भ में अब तक सर्वाधिक लोग आए। यह संख्या पच्चीस करोड़ से ज्यादा थी। स्वच्छता, सुव्यवस्था,सुरक्षा के अभूतपूर्व मानक स्थापित हुए। विश्व में प्रबन्धन, सैनिटेशन तथा भीड़ नियंत्रण की यहाँ अभूतपूर्व व्यवस्था की गई थी। योगी इसे मां गंगा की कृपा मानते है। कुम्भ में गंगा की अविरलता व निर्मलता को देश विदेश से आए करोड़ों भक्तों ने सराहा था। नमामि गंगे परियोजना बहुत सफल हो रही है। गंगा जी निर्मल अविरल हो रही है।
सरकार के प्रयासों से गंगा को पुराने स्वरूप में वापस लाया जा रहा है। गंगा यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले स्थानों का विशेष रूप से विकास किया जाएगा। जिससे गंगा तट पर तीर्थाटन,पर्यटन और व्यवसाय को बढ़ाना संभव हो सकेगा। गंगा यात्रा का उद्देश्य केवल आस्था तक सीमित नहीं है। यह यात्रा गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने अभियान थी। पांच दिवसीय गंगा बिजनौर व बलिया से प्रारंभ हुई।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बलिया से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर से गंगा यात्रा का शुभारंभ किया था। यह यात्राएं प्रदेश के सत्तासी विधान सभा क्षेत्रों छबीस लोकसभा क्षेत्रों से निकली। दोनों यात्राओं ने सड़क मार्ग एक हजार दो सौ अड़तीस और नाव से एक सौ पचास किमी की दूरी तय की। गंगा का कुल बहाव दो हजार पांच सौ पच्चीस किलोमीटर है। इसमें एक हजार एक सौ चालीस किमी लंबा क्षेत्र उत्तर प्रदेश में है।
बलिया से कानपुर तक छह सौ सत्तावन और बिजनौर से कानपुर तक पांच सौ इक्यासी किमी की यात्रा सड़क मार्ग से हुई। एक सौ पचास किमी यात्रा जल मार्ग से पूर्ण हुई। आनंदीबेन पटेल ठीक कहा कि गुजरात में मात्र एक नदी है। उत्तर प्रदेश में नदियां ही नदियां हैं। मानव जीवन बचाने के लिए इन नदियों को प्रदूषित होने से बचाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर विचार किया और नदियों को बचाने के लिए कदम उठाये गए। गुजरात में मुख्यमंत्री रहते उन्होंने कारखानों के गन्दे जल को शुद्ध करके नदी में जाने के लिए एसटीपी प्लांट लगवाया। इससे नर्मदा निर्मलहो गई। अब नमामि गंगे अभियान चल रहा है। इससे गंगा जी निर्मल होंगी।
भारतीय परंपरा में नदियां,जीव जंतु भी हमारे परिवार का हिस्सा है। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी हमारी है। हमारे चिंतन में वसुधा भी कुटुंब है। सबको बचाने से ही हमारा जीवन बचेगा। पौधरोपण हम सबका कर्तव्य है। राज्य सरकार किनारे के गांवों में समुचित विकास, शुद्ध पानी की उपलब्धता,गंगा उद्यान, खेल मैदान सहित हर प्रकार की सुविधाओं को उपलब्ध करा रही है। गंगा किनारे गांवों में जीरो बजट खेती व ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
गंगा उद्यान,गंगा खेल मैदान,गंगा चबूतरा आदि का निर्माण होगा। शहर का मल, कारखानों का गंदा पानी गंगा में नहीं जाने दिया जाएगा। साढ़े तीन लाख करोड़ खर्च करके हर घर तक पाइप से शुद्ध पानी पहुंचाय जाएगा। गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है। इसके प्रदूषण को समाप्त करने व पहले वाला स्वरूप देने के उद्देश्य से ही नमामि गंगे एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया था।







