सरदाना कमज़ोरी

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नवेद शिकोह

दीवार या होल्डिंग पर लिखी किसी नीम-हकीम या फर्जी डाक्टर की क्लिनिक के विज्ञापन की एक पंच लाइन याद होगी। ये अपनी बॉन्डिंग और झूठा प्रचार इसकद्र करते हैं कि इन नीम हकीमों/फर्जी डाक्टर्स की दुकानें इतनी चलती हैं कि क्वालीफाई डाक्टर्स की क्लीनिक्स भी इतनी नहीं चल पातीं। यही हाल पत्रकारिता में भी है।
पत्रकार का ज्ञान कमज़ोर नहीं होना चाहिए है। लेकिन दुख की बात है कि रोहित सरदाना जैसे दर्जनों टीवी स्टार्स पत्रकार/एंकर्स का ज्ञान बेहद कमज़ोर है। धर्म, इतिहास, साहित्य, विज्ञान.. या किसी भी विषय पर कुछ भी गलत-सलत बोल देते हैं.. कुछ भी उलटा-सीधा लिख देते हैं। ये पत्रकार बॉन्ड मीडिया ग्रुप्स मे हैं। इनके नाम की बॉन्डिंग हो चुकी है इसलिए इनके झूठ को सच मान लिया जता है। इनके ग़लत को सही समझ लिया जाता है। और इस तरह ज्ञान का अमृत बरसाने के बजाय अज्ञान का विष थोपने वाले बड़े-बड़े पत्रकार पत्रकारिता का बलात्कार कर रहे हैं।

मशहूर टीवी पत्रकार रोहित सरदाना जी का ट्वीट देखिये,ये नीबू के टोटके को भी पूजा बता रहे हैं। आप खुद बताइये, नीबू काटना, नीबू लटकाना.. इत्यदि क्या पूजा है या ये टोटका है। सनातन धर्म की विधिवत पूजा या किसी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और नीबू टोटके में ज़मीन-आसमान का अंतर है। भारत के नये लड़ाकू विमान राफेल की पूजा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की। ये अच्छी बात है। लेकिन नीबू का टोटका पूजा के अतिरिक्त था। भारत चांद पर पंहुच चुका है। हम विश्व शक्ति बनने जा रहे हैं। हमारी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का दुनिया सम्मान करती है। समारे देश ने विज्ञान के क्षेत्र में भी झंडे गाड़े हैं। विज्ञान ऐसे टोटके को अंधविश्वास और रूढ़िवादिता मानती है।

पूजा का स्वागत और सम्मान है किंतु कोई भी पढ़ा लिखा देश या नागरिक नीबू जैसे टोटकों पर हंसता है। दुनिया हमारा मज़ाक उड़ायेगी तो क्या हमे अच्छा लगेगा!

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