आस्था और लोगों के विश्वास की नगरी भुवनेश्वर की अपनी एक अलग छवि है यहाँ आमतौर पर पर्यटकों की खासी भीड़ रहती है लोग दूर दूर से यहाँ घूमने और यहाँ की संस्कृति को देखने आते हैं। विशेषरूप से मंदिरों की धार्मिक नगरी भुवनेश्वर उड़ीसा प्रदेश की राजधानी है, यह दो हिस्सों में बटा हुआ है। पुराने भुवनेश्वर में अतीत के स्मृति चिन्ह, एवं ऐतिहासिक गौरव-गाथा के अनुसार प्रतीत होते हैं। इसके विपरीत नये भुवनेश्वर में आधुनिक प्रगति के नित नये आयाम स्थापित हो रहे हैं।
सम्पूर्ण भुवनेश्वर मंदिर से घिरे होने के कारण इसे मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है। इस प्रदेश में मंदिर निर्माण का सिलसिला राजा ययाति केसरी ने प्रारम्भ किया था। समय के साथ -साथ यहां मंदिरों की संख्यों में वृद्धि अवश्य हुई लेकिन सभी मंदिर समय के साथ ही ध्वस्त भी हुए और अब कुछ ही मंदिर दर्शनों के लिये अवशेष बचे हैं। यहां के ललाट केसरी द्वारा निर्मित लिंगराज में जो मंदिर स्थापित है उसमें केवल हिंदू धर्मावलंबीयों को प्रवेश करने की अनुमति हैं। यहां के कई अन्य मंदिर भी दर्शन करने योग्य है।
लोगों की राय हैं कि भुवनेश्वर इधर कुछ सालोँ में बहुत बदला है यहाँ का कल्चर अब नयी जनरेशन के हिसाब से बदल रहा है कहते है अब एक तरफ धार्मिक नगरी है तो दूसरी तरफ नया शहर, जो नये इतिहास कि ओर अग्रसर है।
वैसे उड़ीसा के खास पर्यटक आकर्षण पुरी और भुवनेश्वर और कोनार्क के मंदिर शहरों हैं। ये तीन पर्यटक आकर्षण एक सुविधाजनक और कॉम्पैक्ट थोड़ा स्वर्ण त्रिकोण बनाते हैं। पुरी में जगन्नाथ मंदिर, कोनार्क में सूर्य मंदिर, लिंगराज और भुवनेश्वर और चंद्रबागा और पुरी बीच में राजा- रानी मंदिर क्षेत्र के कुछ मुख्य आकर्षण हैं।
आइयें जानते है इन खास मंदिरों के बारे में-
लिंगराज मंदिर: कहते है कि इस मंदिर के लिए लोगों की बड़ी श्रद्धा है क्योकि लिंगराज के इलाके में माता पार्वती ने दो भंकयर दानव लिट्टी और वसा का वध किया था। मान्यता है की युद्ध के बाद माता पार्वती को जब प्यास लगी तो भगवान् शिव ने कुवां बनाया और सभी नदियों को आह्वान किया जिस्सके बाद उनकी प्यास बुझी।

अन्त वासुदेव मंदिर: यह मंदिर उड़ीसा के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है इस मंदिर के स्थापक, वासुदेव कृष्ण है।
परशुरामेश्वर मंदिर: यह मंदिर वर्ष 650 ई. में निर्मित इस मंदिर में भगवान शिव के पुत्र कार्तिक की भव्य मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर के दीवारों पर महाभारत एवं रामायण कालीन कथाओं के चित्रों को उकेर कर सुसज्जित किया गया है।
बिंदु सरोवर: यहां के इस सरोवर पर मां भगवती पार्वती जी के प्यास को बुझाने के लिये इस सरोवर को निर्मित किया गया था जिसे यहां के सभी जलस्त्रोतों से बूंद-बूंद भर जल प्राप्त होता रहता था उसी वक्त से इस सरोवर का नाम बिंदु सरोवर विख्यात हुआ।
केदारेश्वर मंदिर: यह प्राचीन मंदिर मां दुर्गा देवी का है यहां पर आकर उनके दर्शन करने के पश्चात ह्रदय में उनके लिए श्रद्धा सुमन खिल उठता है। यहां पर आदमकद बजरंगबली जी की मूर्ति एवं गौरी मंदिर एवं गौरीकुंड भी श्रद्धालुओं के लिए दर्शनीय स्थल है। इस कुंड के निकट दुधगंगा का व्याधिनाशक चमत्कारी जल प्रवाह है। राजा-रानी मंदिर, भास्करेश्वर शिव मंदिर, मधेश्वर भूमि, वन्दन कानन, म्यूजियम इत्यादि भी यहां के दर्शनीय स्थल है।
पुरी: उड़ीसा प्रदेश में स्थापित पवित्र हिंदू धर्मालंबियों के तीर्थ श्रद्धा एवं आस्था पूर्ण केंद्र है। यहां के इस मंदिर में मानवों के पालनकर्ता भगवान विष्णु एवं 16 कलाओं से पूर्ण भगवान श्री कृष्ण के अवतार श्री जगन्नाथ भगवान जी की मूर्ति स्थापित है। यहां के विशाल समुद्र मानो सृष्टिकर्ता की अदभुत विशाल शक्ति को दर्शाता हुआ हिलोरे मारता है एवं उसमें एक बार उठती और फिर उसमें विलय होती रहती लहरें मानो संसार को नित्य उत्पति व विसर्जन होने का संदेश अपनी मूक भाषा में दर्शनार्थियों को समझाने का प्रयास करती है। ऐसी मान्यता है कि पुरी में तीन दिन एवं तीन रातें ठहरने पर मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यहां मुख्य रूप से जगन्नाथ जी पूजा अर्चना बहुत श्रद्धा के साथ की जाती है। भगवान जगन्नाथ के माथे पर मूल्यवान हीरा जड़ा हुआ है।
उड़ीसा के पर्यटन स्थल:
क्रिश्चियन धर्मावलंबी लोग ईशामसी क्राइस्ट को अपना भगवान मानते है, यह माधर्मावलंबी वाले क्रिश्चियन आदिवासियों का क्षेत्र अपने मनभावन प्राकृतिक सौंदर्य छटाओं के लिये सम्पूर्ण देश मे जाना जाता है।
गंजाम: यह जिला प्राकृतिक संपदा से मालामाल है। यहां कई दर्शनीय स्थल है। ऊँचे-नीचे पहाड़ी शिखरो के बीच से बहने वाली तप्तपानी चर्म-रोगों विनाशक की शक्ति लिये गर्म पानी का कुण्ड है।
मार्कंडेश्वर मंदिर: यहां के पवित्र जल में इंसानों के स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यहाँ से निकट पर स्थित लोकनाथ मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति स्थापित है।
गोपालपुर: इस स्थान की ख्याति का मुख्य कारण यहां के अति सुंदर समुद्री तट एवं इन तटों पर स्वस्थ प्रदूषण मुक्त जलवायु है। यहां समुद्र में में नहाने का आनंद लिया जा सकता है।
महेन्द्रगिरि: यह उड़ीसा का एक पौराणिक पहाड़ी क्षेत्र है, जो समुद्र तल से 5,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर पहुंचने के लिए सबसे पहले 43 किमी. बस से सफर करने के पश्चात पैदल-यात्रा कर महेन्द्रगिरी पहुंचा जा सकता है। यहां के चोटी पर पहुंचकर वहां स्थित मंदिरों का दर्शन कर समस्त शारीरिक थकान दूर हो जाती है। यहां पर कुन्ती, भीम एवं धर्मराज युधिष्ठिर का मंदिर सिथित है।







