विद्युत उपभोक्ताओं से वसूली जा रही इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के आदेश को किया जाये समाप्त

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  • बिजली कम्पनियां प्रत्येक वर्ष विद्युत उपभोक्ताओं से इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के मद में रू0 1250 करोड़ वसूल कर जमा करती हैं सरकार के खजाने में
  • प्रदेश के घरेलू उपभोक्ता जहां 5 प्रतिशत देते हैं इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वहीं प्रदेश का अनमीटर्ड किसान सबसे ज्यादा 20 प्रतिशत देता है इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी

लखनऊ,20 अक्टूबर 2019: उपभोक्ता परिषद् ने रेगुलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत खत्म कराने के बाद अब उपभोक्तओ पर लगने वाली  इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी को समाप्त कराने के लिए संघर्ष की एक बार फिर शुरुआत कर दी है और उसी के तहत सरकार से यह मांग उठायी है की केन्द्र सरकार ने जीएसटी लागू करके यह प्रचारित किया कि एक देश एक टैक्स के सहारे अब देश विकास के रास्ते पर जायेगा, लेकिन अभी भी पूरे देश में बिजली उपभोक्ता इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के रूप में एक टैक्स और सरकार के खजाने में जमा कर रहे हैं। बिजली के क्षेत्र में चाहे वह पावर हाउस के उपकरण हों, सोलर के उपकरण हों, कोयला हो सभी पर जीएसटी के तहत टैक्स वसूला जायेगा और निश्चित तौर पर उसका भुगतान अन्ततः देश का विद्युत उपभोक्ता करेगा। वहीं दूसरी ओर विद्युत उपभोक्ता इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के रूप में अलग एक टैक्स सरकार के खजाने में जमा कर रहा है।

 

उपभोक्ता परिषद् ने कहा कि पूरे भारत देश में सभी राज्यों द्वारा लगभग 28 हजार करोड़ इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के मद में वसूला जाता है। उप्र के लगभग 1 करोड़ 80 लाख विद्युत उपभोक्ताओं से प्रदेश की बिजली कम्पनियां प्रत्येक वर्ष लगभग रू0 1250 करोड़ इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के रूप में वसूल कर उप्र सरकार के खजाने में जमा करती हैं। क्योंकि इस रकम से बिजली कम्पनियों का कोई लेना देना नहीं।

परिषद् ने कहा कि वर्तमान में उप्र सरकार के शासनादेश के प्राविधानों के तहत बिजली कम्पनियां घरेलू उपभोक्ताओं से 5 प्रतिशत अन्य से 7.5 प्रतिशत व अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूलती हैं। गौरतलब है कि अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की श्रेणी में सबसे ज्यादा ग्रामीण अनमीटर्ड किसान आते हैं। उपभोक्ता परिषद एक देश एक टैक्स के आधार पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी से मांग करती है कि प्रदेश में इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी सम्बन्धी आदेश को अविलम्ब समाप्त किया जाये, जिससे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को दोहरे टैक्स से निजात मिल सके।

इस बाबत उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के  सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उप्र की वर्तमान सरकार प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के अनेकों उपाय कर रही है लेकिन अविलम्ब सरकार अपने इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी रूपी टैक्स को वापस लेकर अविलम्ब प्रदेश के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दे सकती है।

गौरतलब है कि सपा सरकार के कार्यकाल में नाम मात्र कुछ पैसे प्रति यूनिट लगने वाली इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी को बढ़ाकर प्रतिशत में कर दिया। उपभोक्ता परिषद की मांग पर नियामक आयोग द्वारा उप्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजकर घरेलू व किसानों की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी को समाप्त करने हेतु पत्र भी लिखा गया, उसके बावजूद भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

उप्र विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ता परिषद की याचिका पर बिजली कम्पनियों को यह निर्देश दिया कि इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी केवल एनर्जी चार्ज पर वसूला जाये लेकिन उप्र में एनर्जी चार्ज, फिक्स चार्ज को जोड़कर लगने वाले कुल बिल पर वसूला जा रहा है, जो कि पूरी तरह गलत है। ऐसे में उप्र सरकार को अविलम्ब एक देश एक टैक्स के आधार पर प्रदेश में लगने वाली इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी को अविलम्ब समाप्त किया जाये।

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