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सेंटा मोदी ने रिटर्न गिफ्ट पर ज़ोर दिया

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नवेद शिकोह

प्रभु यीशु और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर आज उत्तर प्रदेश की राजधानी में बहुत कुछ ख़ास था। अटल और तहज़ीब के शहर लखनऊ के ह्रदय हजरतगंज के तीन मुख्य गिरिजाघरों में ख़ास रौनक थी। और इन गिरिजाघरों के बीच लोकभवन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेंटा बनकर शहरवासियों के लिए नसीहतों के गिफ्ट लेकर आये थे। उनकी सबसे ख़ास नसीहत ये थी कि गिफ्ट लेने वालों को रिटर्न गिफ्ट की जिम्मेदारी का पूरा अहसास होना चाहिए है। यानी अधिकारों की बात करने वालों को अब अपने दायित्य व कर्तव्य का पालन करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

स्वर्गीय अटल विहारी वाजपेयी की जयंती पर उनकी प्रतिमा का अनावरण करने के साथ प्रधानमंत्री ने अटल जी की खूबियां और अपनी सरकार की उपलब्धियां बयान कीं। आगामी नववर्ष की शुभकामनाएं भी दी किंतु क्रिसमस की बधाई देना शायद वो भूल गये। अपनी सरकार को चुनौतियों को चुनौतियां देने वाली सरकार बताते हुए उन्होंने कश्मीर में धारा 370 को विरासत की चुनौतियों से निपटने का सफल आपरेशन बताया। इसी तरह राम मंदिर फैसले पर शांति व्यवस्था और नागरिक संशोधन बिल को बड़ी उपलब्धि के रूप मे लिया।

इन बातों के साथ प्रधानमंत्री ने CAA- NRC पर विरोध प्रदर्शन में लखनऊ में हिंसा के जिक्र में नरेंद्र मोदी ने नसीहत देते हुए कहा कि लखनऊ के नौजवानों को अपने कर्तव्यों और दायित्यों को निभाने का अहसास होना चाहिए है। हम 75 साल तक सिर्फ अधिकारों- हक़ों की बात करते रहे, अब कर्तव्यों, दायित्यों की जिम्मेदारियों को निभाने का समय आ गया। उन्होंने कहा कि डाक्टर का कर्तव्य है कि वो मरीज का इलाज करे और मरीज और उसके तीमारदारों का कर्तव्य है कि वे डाक्टर को मान-सम्मान देने के दायित्व का निर्वहन करे।

प्रधानमंत्री की इस नसीसत को सुन कर लखनऊवासियों को लगा कि वो क्रिसमस के अवसर पर सेंटा बनकर गिफ्ट देने नहीं आये बल्कि रिटर्न गिफ्ट देने की जरूरत के अहसास का अहम उपहार दे गये।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भारतीय जनमानस में जबरदस्त लोकप्रियता का यह भी कारण है कि वे ना सिर्फ देश के हर दिल अज़ीज़ प्रधानमंत्री है बल्कि प्रधानसेवक और भारतीय परिवार के मुखिया के तौर पर पेश आते रहते हैं। स्वच्छता अभियान में जनता को इस सामाजिक अनुष्ठान से जोड़ने की गुजारिश हो या दौलतमंद लोगों से गैस सिलेंडर पर सब्सिडी त्यागने का आग्रह हो, प्रधानमंत्री की हर गुजारिश पर देश की जनता अमल करती है।

एक मुखिया और संरक्षक मानकर नरेंद्र मोदी की नसीहतों से भारतीय समाज बेहतर आचरण और व्यवहार की तरफ बढ़ रहा है।

किसी विरोध प्रदर्शन में दंगा-फसाद, तोड़फोड़ और सरकारी/निजी संपत्तियों को नुकसान पंहुचाने की घटनाओं से प्रधानमंत्री का आहत होना लाज़मी भी था। तहज़ीब के शहर लखनऊ में भी CAA- NRC के विरोध में हिंसात्मक प्रदर्शन हुआ था। और इन घटनाओं के चंद दिनों बाद लखनऊ आये नरेन्द्र मोदी ने इन घटनाओं पर दुख व्यक्त करते हुए आंदोलनकारियों को नसीहत दी। उनकी इस नसीहत का आशय ये था कि यदि सरकार के किसी फैसले के प्रति कोई तब्का विरोध प्रदर्शन का अधिकार रखता है तो ऐसे लोगों को कानून व्यवस्था को भंग ना करने का कर्तव्य भी है।

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