स्विस बैंक ने भारत को उपलब्ध कराया कालाधन का चिट्ठा, फंसेंगीं बड़ी मछलियां

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स्विट्जरलैंड को करीब 24 लाख खातों की जानकारी मिली, स्विस बैंकों ने उपलब्ध कराई भारतीयों के खाते की जानकारी, इस सूची में शामिल हैं ज्यादातर उद्योगपतियों के नाम, भारत छोड़कर अमेरिका में बसने वाले कई एनआरआई के नाम भी शामिल

नई दिल्ली,09 अक्टूबर 2019: भारत सरकार को स्विस बैंक खातों में भारतीयों के जमा काले धन को लेकर बड़ी कामयाबी मिली है। मीडिया खबरों के अनुसार स्विट्जरलैंड सरकार ने बताया है कि सूचना के स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था के तहत भारत को अपने नागरिकों के कालेधन बैंक खातों की पहली सूची मिली है। स्विट्जरलैंड के कर विभाग के अधिकारियों ने एजेंसी से कहा कि सितंबर 2020 में भारत के साथ फिर वित्तीय खातों की सूचनाओं का आदान प्रदान किया जाएगा। बता दें कि भारत उन 75 देशों में शामिल हैं जिनके साथ स्विट्जरलैंड सरकार ने बैंक खातों से जुड़ी जानकारियां साझा की है। स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन (एफटीए) ने 75 देशों के साथ एईओआई के मानदंडों के तहत वित्तीय खातों के ब्योरे के आदान-प्रदान का करार किया है। भारत भी इनमें शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एफटीए के प्रवक्ता ने कहा कि भारत को पहली बार एईओआई ढांचे के तहत खातों के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। बताया जा रहा है कि इसमें उन खातों की सूचना दी जाएगी जो अभी सक्रिय है। इसके अलावा उन खातों का ब्योरा भी उपलब्ध कराया जाएगा जो 2018 में बंद किए जा चुके हैं।

24 लाख खातों की जानकारी मिली:

रिपोर्ट्स के अनुसार प्रवक्ता ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत अगली सूचना सितम्बर, 2020 में साझा की जाएगी। हालांकि, सूचनाओं के इस आदान-प्रदान की कड़े गोपनीयता प्रावधान के तहत निगरानी की जाएगी। एफटीए के अधिकारियों ने भारतीयों के खातों की संख्या या उनके खातों से जुड़ी वित्तीय संपत्तियों का ब्योरा साझा करने से इनकार किया। कुल मिलाकर एफटीए ने भागीदार देशों को 31 लाख वित्तीय खातों की सूचना साझा की है। वहीं स्विट्जरलैंड को करीब 24 लाख खातों की जानकारी मिली है। साझा की गई सूचना के तहत पहचान, खाता और वित्तीय सूचना शामिल है। इनमें निवासी के देश, नाम, पते और कर पहचान नंबर के साथ वित्तीय संस्थान, खाते में शेष और पूंजीगत आय का ब्योरा दिया गया है।

12 देशों को नहीं दी गयी सूचना:

रिपोर्ट्स के अनुसार स्विट्जरलैंड सरकार ने अलग से बयान में कहा कि इस साल एईओआई के तहत 75 देशों के साथ सूचना का आदान-प्रदान किया गया है। इनमें से 63 देशों के साथ यह परस्पर आदान-प्रदान है। करीब 12 देश ऐसे हैं जिनसे स्विट्जरलैंड को सूचना तो प्राप्त हुई है लेकिन उसने उनको कोई सूचना नहीं भेजी है क्योंकि ये देश गोपनीयता और डेटा सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय अनिवार्यताओं को पूरा नहीं कर पाए हैं। जानकारी के अनुसार इन देशों में बेलीज, बुल्गारिया, कोस्टारिका, कुरासाओ, मोंटेसेराट, रोमानिया, सेंट विन्सेंट, ग्रेनेडाइंस और साइप्रस शामिल हैं। इसके अलावा बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमैन आइलैंड, तुर्क्‍स एंड कैकोज आइलैंड आदि देशों ने सूचना नहीं मांगी है, इसलिए उन्हें खातों का ब्योरा साझा नहीं किया गया है।

7,500 संस्थानों से जुटाए आंकड़े:

बताया जा रहा है कि एफटीए ने बैंकों, न्यासों और बीमा कंपनियों सहित करीब 7,500 संस्थानों से ये आंकड़े जुटाए हैं। पिछले साल की तरह इस बार भी सबसे अधिक सूचनाओं का आदान-प्रदान जर्मनी को किया गया है। बयान में कहा गया है कि एफटीए वित्तीय संपत्तियों के बारे में कोई सूचना नहीं देता है। भारत के नागरिकों के बारे मे साझा की गई सूचनाओं के बाबत एफटीए प्रवक्ता ने कहा कि सांख्यिकी आंकड़े भी गोपनीयता के प्रावधान के तहत आते हैं।

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