ईमान वालों भाजपा पर सवाल मत उठाओ !

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गुनाहगार का मुसल्लम ईमान तो ईमान लाने के बाद ही होता है

नवेद शिकोह

कम से कम इस्लाम से ताल्लुक़ रखने वालों को तो भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठाने चाहिए है। भाजपा अगर आरोपियों/दागियों को अपनाती है तो इस्लाम का भी तो यही क़ायदा रहा है। इस्लामिक थ्योरी के मुताबिक़ इस्लाम पर ईमान लाने वाला हर कोई पहले गुनाहगार, काफिर या नादान ही तो था।

इस्लाम के जन्म पर ग़ौर कीजिए, इसकी उम्र और इसके इतिहास को जानिए तो महसूस होगा कि इस्लामी थॉड से भाजपा की मौजूदा गतिविधियां काफी प्रभावित हैं।

इसलिए मुसलमानों को भाजपा पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए है और भाजपा वालों को इस्लाम का ख़ूब सम्मान करना चाहिए है। क्योंकि कई बार भाजपा इस्लामी लगती हैँ।

इस्लाम धर्म बहुत पुराना नहीं है। इस धर्म पर ईमान लाने वाले अधिकांश लोगों का पहले किसी दूसरे धर्म से ताल्लुक था। कहते है भारत के अधिकांश मुसलमान पहले सनातनी थे। काफिर थे। काफिर का अर्थ है- जो एक से अधिक खुदा(भगवान) मानता हो। जो खुदा या भगवान को निराकार ना मानता हो। ऐसे ही काफिरों ने दूसरे धर्मों की तमाम बातों को त्यागकर एक नया अक़ीदा क़ायम कर ही इस्लाम कुब़ूल किया था।

जब इन लोगों ने इस्लाम अपना लिया तो इनका ईमान मुसल्लम हो गया, ये मुसलमान हो गये।

ईमान लाने वालों अब मत कहना कि भाजपा पर आस्था रखने के बाद अजित पवार भ्रष्टाचार पर लगे इल्ज़ामों से बरी क्यों हो गये!

इस्लामी अक़ीदा तो यही कहता है कि ईमान लाने के बाद सारे पाप धुल जाते हैं।
शायद भाजपा इस्लाम के इस थॉड से प्रभावित हो। तमाम गंभीर आरोपों से घिरे गैरभाजपाई नेता जब भाजपा में शामिल हो जाते हैं या भाजपा को समर्थन देते हैं तो इनके पाप/भ्रष्टाचार के आरोप धुल जाते हैं।

भाजपा इस्लाम से प्रभावित ही नहीं है बल्कि इसकी सरकारों में मुसलमानों की जरूरतों और भावनाओं का अतिरिक्त ख्याल रखा जाता है। इस बात की अक्सर दलीलें मिलती हैं। अयोध्या के बरसों पुराने विवाद को सुलझाने और राम मंदिर के निर्माण के लिए भाजपा चाहती तो संविधानिक तरीक़े से अपने प्रचंड जनादेश का सहारा लेकर मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून पास करवा लेती। धारा 370 से लेकर तीन तलाक का बिल पास करवाना बेहद जटिल था। फिर भी अपने बहुमत और विपक्ष की सहमति के बूते पर भाजपा ने नामुम्किन कहे जाने वाले बिल पास करने के ख्याल को मुम्किन कर दिखाया।

इसी तरह मदरसों के आधुनिकीकरण, अनुदान, तुलबा को वज़ीफा ( स्कालरशिप) जैसे नेक कामों से भाजपा सरकार ने मुस्लिम समुदाय का अतिरिक्त ख्याल रखने का सिलसिला जारी रखा है। मुस्लिम समाज अपने घर की बेटियों की रक्षा-सुरक्षा और सम्मान को लेकर कुछ ज्यादा ही फिक्रमंद रहा है। चिंता की अति के होते कई मुस्लिम बेटियां स्कूल-कॉलेज ना भेजे जाने से शिक्षा में पिछड़ जाती थीं। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आते ही यूपी की बेटियों की हिफाजत के लिए सबसे पहले यूपी पुलिस ने ऑपरेशन मजनू चलाया।

इसी क्रम में यूपी में भाजपा सरकार ने अपने शुरुआती फैसलों में मीट व्यापार में साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए बूचड़खानों के लाइसेंस की अनिवार्यता पर जोर दिया। स्वास्थ्य और शरियत दोनों के लिए ये क़दम बेहद ज़रूरी था। क्योंकि पहले मीट के कारोबार में पार्दर्शिता ना होने के कारण बीमार, मृत, हराम और प्रतिबंधित जानवरों का मास भी बेच दिया जाता था। जो मुस्लिम मुस्लिम समाज के स्वास्थ्य और शरियत दोनों के लिए ठीक नहीं था।

ये सब नज़र आने और इन बातों पर ग़ौर किये जाने के बाद ही इस्लाम, शरियत, मुस्लिम समाज और भाजपा के बीच दूरियां कम होती जा रही हैं।