हम अपने देश की स्वत्रंतता दिवस 15 अगस्त के दिन आजादी मिलने के समय से मनाते चले आ रहे हैं। हमारे देश को मिली आजादी को सदैव समरण रखने के लिये हम इसे मानते हैं। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि हमारे देशवासियों को इस आजादी को हासिल करने के लिये बहुत लम्बे समय तक संघर्ष और वलिदान करना पड़ा, सही अर्थों में इस आजादी को हासिल करने के लिये जिन लोगो ने अपने माँ -बाप, भाई-बहनों के साथ अपने बीबी बच्चों तक के जान की परवाह न करते हुये देश के लिये जान की बाजी लगा कर हसंते हुये अपने प्राणों को निछावर कर शहीद हो गये उन वीर सपूतों के नाम जो इतिहास के पन्नो में दर्ज होने से वंचित रहे हम उन शहीदों को श्रद्धांजलि देने और उन्हें याद करने के लिये इस दिन को स्वत्रंतता दिवस के रूप में मनाते चले आ रहे हैं।
आज 15 अगस्त के दिन स्वत्रंतता संग्राम में शहीद हुये उन गुमनाम सेनानियों के वलिदान एवं त्याग को यादकर प्रत्येक 15 अगस्त के दिन देश के लोगों के जेहन में एक बात कुलबुलाने लगती है कि आज हम आजाद होते हुये भी क्या सही अर्थों में हम आजाद हैं? इस तरह के प्रश्नों के उत्तर में हमे नही कहना पड़ता है क्योंकि आजादी कहने सुनने में तो अच्छी लगती है लेकिन आज तक हमे सम्पूर्ण आजादी हासिल ही नही हुई क्योंकि आज भी अंग्रेजो द्वारा बनाये गये व्यवस्था और नियमों को लागू कर देश की शासन सत्ता को संभाल रहे हैं ऐसे में फिर वही सवाल उठता है कि क्या हम वास्तव में आजाद है? आजादी का सही अर्थ आज धूमिल हो गया है आजाद और आजादी जैसे शब्द अर्थविहीन हो कर रह गये हैं। आजादी मात्र कहने तक ही सीमित न हो कर वास्तव में इसका अर्थ आज गौण होते चले गये लेकिन वास्तव में आजादी धरातल पर महसूस करने वाली चीज है।
आजादी जितनी जल्दी से पुकार व समझ लिया जाता हैं क्या वास्तव में क्या इस शब्द का उच्चारण हमारे देशवासीयों को इतनी सहजता से करने को मिला है? इस शब्द को आज हमें कहने सुनने के लिये स्वत्रंत हैं यह मात्र हमारे देश के स्वत्रंतता सेनानियों के बलिदानों के बदौलत ही संभव हुआ है।
इस आजादी को हासिल करने के लिये हमारे देश के लाखों करोडों लोगों को लोहे के चने चबाने पड़े हैं।
आज हम और हमारे सन्तततियों को शायद ही इस बात का अहसास और आजादी शब्द के पीछे छुपे हुये उन कडुवाहट का भान तक नही होगा जिन्हें उस वख्त के हमारे शहीद पूर्वजों के साथ ही साथ देशवासियों ने भी झेला और अपने आप को बलिदान कर अपना सब कुछ देश पर निछावर कर दिया। हमे उन लोगों के प्रति अहसानमंद रहते हुये और उनके प्रति सम्मान की भावना रखते हुये उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें कोटि- कोटि नमन करते हैं।
- प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती







