नई दिल्ली, 21 जून 2025: ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका इज़राइल-ईरान युद्ध में सीधे शामिल होता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। बता दें कि यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार की रीढ़ है, जहां से प्रतिदिन 100 से अधिक तेल और मालवाहक जहाज गुजरते हैं, जो दुनिया के 26% कच्चे तेल और 25% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति को संभालता है। ईरानी सांसद अली याज्दिखाह ने समाचार एजेंसी मेहर को बताया कि अमेरिकी हस्तक्षेप की स्थिति में ईरान इस मार्ग को बंद करके अमेरिका और पश्चिमी देशों पर दबाव बनाएगा।
वैश्विक स्तर पर बढ़ेंगी तेल की कीमतें
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ईरान और ओमान के बीच 33-95 किमी चौड़ा समुद्री मार्ग है, सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, और इराक जैसे देशों से तेल और गैस निर्यात का मुख्य रास्ता है। इसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति में 20-30% की कमी आ सकती है, जिससे तेल की कीमतें 100-150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, और कुछ अनुमानों के अनुसार 350 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इससे वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट, शिपिंग लागत में वृद्धि, और खाड़ी क्षेत्र के व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध में “टैंकर युद्ध” के दौरान भी इस मार्ग पर हमले हुए थे, लेकिन इसे पूरी तरह बंद नहीं किया गया।
भारत में तेल और गैस की हो सकती है कमी
भारत अपनी तेल की आवश्यकताओं का 85-90% आयात करता है, जिसमें से 40-50% होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते इराक, सऊदी अरब, और यूएई से आता है। भारत प्रतिदिन 5.5 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है, जिसमें 1.5 मिलियन बैरल इस जलमार्ग से आता है। इसके बंद होने से भारत में तेल और गैस की कमी हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई में उछाल आएगा, और परिवहन, विनिर्माण, और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र प्रभावित होंगे। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से भारत का आयात बिल 13-14 अरब डॉलर बढ़ सकता है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) और रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ेगा।
कम से कम तीन महीने का सामरिक तेल भंडार है : केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री
भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वासन दिया है कि भारत के पास कम से कम तीन महीने का सामरिक तेल भंडार है, और आयात स्रोतों को 27 से 40 देशों तक विविधीकृत किया गया है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ये भंडार केवल अल्पकालिक संकटों के लिए हैं, और लंबे समय तक रुकावट से भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ सकता है। वाणिज्य मंत्रालय ने शिपिंग कंपनियों और निर्यातकों के साथ आपात बैठक बुलाई है।
विशेषज्ञों की राय:
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस मार्ग को पूरी तरह बंद करने का जोखिम नहीं उठाएगा, क्योंकि यह खुद उसके तेल निर्यात, विशेष रूप से चीन को, प्रभावित करेगा। फिर भी, जहाजों पर हमले या आंशिक रुकावट से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है। अमेरिका, जिसके 40,000 सैनिक खाड़ी क्षेत्र में तैनात हैं, ने चेतावनी दी है कि वह इस मार्ग को बंद नहीं होने देगा।
फिलहाल जलडमरूमध्य खुला है, लेकिन तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। यदि युद्ध बढ़ता है, तो भारत सहित एशियाई देशों, विशेष रूप से चीन, जापान, और दक्षिण कोरिया, पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा, जो इस मार्ग से 82% तेल और गैस आयात करते हैं।







