तेल अवीव/तेहरान, 23 जून 2025: ईरान और इज़रायल के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका और इज़रायल के हमलों के जवाब में इज़रायल पर 400 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इनमें खुर्रमशहर-4, जिसे ‘खैबर’ मिसाइल के नाम से जाना जाता है, ने इज़रायल की रक्षा प्रणाली को चुनौती दी है। ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, 40 से अधिक मिसाइलें अपने निशाने पर लगीं, जिससे तेल अवीव, हाइफा, और जेरूसलम में भारी नुकसान हुआ।
खैबर मिसाइल का खौफ:
खैबर मिसाइल, जिसका नाम 7वीं सदी में सऊदी अरबिया के खैबर किले पर मुस्लिम विजय से प्रेरित है, 2,000 किमी की रेंज और 1,800 किग्रा तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इस मिसाइल से इज़रायल के डिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बना सकता है, जो इज़रायल की कथित परमाणु हथियार सुविधा है। हालांकि, अभी तक डिमोना पर सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है।
उत्तर कोरिया का कथित समर्थन:
उधर सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि उत्तर कोरिया ईरान को परमाणु हथियारों की आपूर्ति कर सकता है। हालांकि, न तो ईरानी और न ही उत्तर कोरियाई आधिकारिक स्रोतों ने इसकी पुष्टि की है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच मिसाइल तकनीक का सहयोग पुराना है, लेकिन परमाणु हथियारों की आपूर्ति का दावा अपुष्ट और अटकलबाजी मात्र है।
इज़रायल ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी:
इज़रायल की आयरन डोम और एरो मिसाइल रक्षा प्रणालियों ने अधिकांश मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, लेकिन कुछ हमलों से तेल अवीव में इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और दर्जनों लोग घायल हुए। इज़रायल ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका ने तटस्थ रुख अपनाया है।
ईरान का यह हमला मध्य पूर्व में युद्ध को और भड़का सकता है। डिमोना पर हमले की आशंका और उत्तर कोरिया की कथित भागीदारी ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है और स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।







