क्या भगवान परशुराम आज भी धरती पर हैं?

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परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार

सनातनी मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास की अक्षय तृतीया को हुआ था और उनके शास्त्र अनुसार पुरातत्व अनुसंधान एवं हजारों वर्ष की मान्यता के अनुसार जन्मस्थली सौभाग्य से जनपद शाहजहाँपुर की जलालाबाद तहसील में ही है। इस वाबत भगवान परशुराम जन्मस्थली को पर्यटन स्थल घोषित करवाने और जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी घोषित हो कि मांग को लेकर वर्षों से आंदोलन किया गया।

मान्यता के अनुसार बताया जाता है कि ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पांचवे पुत्र एवं विष्णु भगवान के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का जन्म जलालाबाद के खण्डहर रोड स्थिति जमदग्नि आश्रम में हुआ था जिसे अब ढकियाईन देवी स्थान के नाम से जाना जाता है। जलालाबाद के मोहल्ला खेड़ा में जो प्राचीन काल मे परशुराम खेड़ा कहलाता था जहां एक प्राचीन दिव्य भगवान परशुराम मंदिर स्थिति है जिसके समक्ष एक धनुषाकार तालाब है जिसे परशुरामताल के नाम से जाना जाता है जो मंदिर से जमदग्नि आश्रम तक फैला हुआ है पर आजकल उसपर नाजायज कब्जा है। कहा जाता है कि जलालाबाद में ही एक गाँव कटका बहादुरपुर भी जिसमे भगवान परशुराम ने अतातायी सहस्त्राबाहु का वध किया था और आज भी इस ग्राम की मिट्टी खोदने पर रक्त जैसी लाल निकलती है जिसपर कई शोध हुये है।

और प्रमाणित भी हुये हैं। मोहल्ला खेड़ा स्थित मंदिर में एक फरसा खुदाई में मिला था जो कि जानकारों के आधार से हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है इस मंदिर की प्राचीनता को मानते हुये 1905 में तत्कालीन तहसीलदार प्रभुदयाल ने इसका जीर्णोद्धार कराया था और इस स्थान की मान्यता आसपास के क्षेत्रों में हर जाति के लोगों में अगाध है और सभी भगवान परशुराम को बाबा परशुराम कहकर बुलाते है और अपना ईश्वरीय पूर्वज मानते हैं।

शास्त्रों और उपनिषदों और वर्तमान हुये कई शोधों से यह सिद्ध हो गया है कि भगवान परशुराम का जन्म जलालाबाद में हुआ था अतः आजकी राष्ट्रवादी सरकार ने हालांकि कई आंदोलनों और मांग के बाद परशुरामताल के सौंदर्गीकरण के लिये कुछ योगदान दिया है जो अपर्याप्त । इस स्थान की प्राचीनता और गौरवशाली इतिहास को देखते हुये इसको भगवान परशुराम की जन्मस्थली घोषित करते हुए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये और इस जन्मस्थली का नाम परशुरामपुरी किया जाये।

Parshuram Jayanti and Akshay Tritiya | Indian Mythologyभगवान परशुराम आज भी धरती पर हैं:

मौजूद माना जाता है कि भगवान परशुराम विष्णु के ऐसे अवतार हैं यह चिरंजीवी हैं और हनुमान जी, अश्वस्थामा की तरह सशरीर पृथ्वी पर मौजूद हैं। हिन्दू धर्म में विशेष त्यौहारों पर गंगास्नान का विशेष महत्व है। इसलिए परशुराम जयन्ती पर भी गंगास्नान की परम्परा चली आ रही है। लेकिन इस बार गंगा स्नान कर पाना संभव नहीं होगा इसलिए घर पर ही गंगा जल मिलाकर गंगा स्नान कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। भगवान परशुराम की जयन्ती पर अक्षय तृतीया का त्यौहार भी धूमधाम से मनाया जाता है।

गणेश जी का काट दिया था दांत:

भगवान परशुराम अपने क्रोध के लिए जाने जाते हैं। उनके क्रोध की यह स्थिति थी कि उन्होंने एक बार भगवान गणेश को भी युद्ध के लिए ललकारा जब गणेश ने उन्हें कैलाश जाने से रोक दिया। दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। क्रोध में आकर भगवान शिव के फरसे से परशुराम ने गणेश जी का एक दांत काट दिया था। इसके बाद से ही गणेश जी एक दन्त कहलाने लगे।

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