नेतन्याहू की रणनीति से गाजा में बढ़ा तनाव, ऑस्ट्रेलिया के साथ कूटनीतिक विवाद गहराया
नई दिल्ली : इजरायल ने गाजा सिटी में हमास के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं। यह ऑपरेशन जल्द शुरू हो सकता है और इसका लक्ष्य हमास के भूमिगत सुरंग नेटवर्क को नष्ट करना और बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करना है। इजरायली सेना ने जैतून और बालिया जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में अपनी तैनाती बढ़ाई है।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 60,000 नए रिजर्व सैनिकों को बुलाया जाएगा और 20,000 पहले से तैनात सैनिकों की सेवा अवधि बढ़ाई जाएगी। गाजा में पिछले 22 महीनों से चल रहा युद्ध पहले ही भारी तबाही मचा चुका है। बमबारी ने शहर को खंडहर में बदल दिया है, और लाखों लोग विस्थापन, भुखमरी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि नया अभियान हालात को और बदतर करेगा। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आक्रामक नीतियां इन प्रयासों को चुनौती दे रही हैं। इजरायल के भीतर भी इस अभियान को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
रिजर्व सैनिक और बंधकों के परिजन इसे गाजा में फंसे करीब 50 बंधकों, जिनमें से केवल 20 के जीवित होने की पुष्टि है, के लिए खतरनाक बता रहे हैं। पूर्व सुरक्षा अधिकारियों ने भी नेतन्याहू पर युद्ध को राजनीतिक कारणों से लंबा खींचने का आरोप लगाया है। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया द्वारा फिलिस्तीन को मान्यता देने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को “कमजोर” और “धोखेबाज” करार दिया, जिसका अल्बनीज ने कड़ा जवाब देते हुए कूटनीतिक शिष्टाचार पर जोर दिया।
यह प्रयास हैं जारी:
- सैन्य तैनाती: इजरायली सेना ने गाजा सिटी के जैतून और बालिया में अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कीं।
- युद्धविराम का प्रयास: मिस्र और कतर की मध्यस्थता में युद्धविराम वार्ता जारी, लेकिन प्रगति धीमी।
- बंधक संकट: गाजा में फंसे 50 बंधकों में से केवल 20 के जीवित होने की पुष्टि, परिजनों ने अभियान का विरोध तेज किया।
- कूटनीतिक तनाव: ऑस्ट्रेलिया के फिलिस्तीन को मान्यता देने के बाद इजरायल ने राजदूत को तलब किया।







