ऐसी मान्यता है कि देव मिलन के दौरान जब कोई भी जगती पत्थर के समीप जाकर कान लगाता है तो उसे ढोल-नगाड़े की मधुर ध्वनि सुनाई देती है। माना जाता है कि जिस भी देवलू को यह आवाज सुनाई देती है, उसे सौभाग्यशाली माना जाता है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में देवभूमि हिमाचल के कण-कण में देवी-देवता विराजमान हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिलता है, देवभूमि में कहीं पर दैवीय शक्ति के कारण देव रथ हवा में उड़ता दिखाई देता है तो कहीं पर पत्थर में दैवीय शक्ति से देवी-देवता के रथ अपने आप आकर्षित होते हैं।
ऐसा ही सदियों पुराना एक चामत्कारिक पत्थर देवभूमि कुल्लू की बंजार घाटी के कलवारी में स्थित है। इस चामत्कारिक पत्थर को जगती पत्थर के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि प्राचीन समय में भगवान लक्ष्मीनारायण कमल फूल से प्रकट होकर लाहौर दिशा से होकर दिल्ली में विराजमान हुए। कुछ समय बीतने के बाद वहां से कांगड़ा, चम्बा व लाहौल होकर कुल्लू पहुंचे थे तथा इसके बाद बंजार घाटी के कलवारी में स्थित जगती पत्थर में विराजमान हुए थे।

इस पत्थर की खासियत यह है कि घाटी के अन्य इलाकों के देवी-देवता जब दूसरे हारियान क्षेत्र में प्रवेश करते हुए इस रास्ते से गुजरते हैं तो दैवीय शक्ति के कारण देवी-देवताओं के देव रथ अपने आप चामत्कारिक पत्थर की ओर आकर्षित होकर इसके आगे शीश झुकाते हैं। इस भव्य देव मिलन को देखकर हारियान भी हैरान रह जाते हैं। हारियान क्षेत्र के दर्जनों देवी-देवता जब तक इस जगती पत्थर के पास जाकर शीश नहीं झुकाते हैं तब तक भगवान लक्ष्मीनारायण के देव रथ के साथ मिलन नहीं होता है।
कहते हैं कि देव मिलन के दौरान जब कोई भी देवलू जगती पत्थर के समीप जाकर कान लगाता है तो उसे ढोल-नगाड़े की मधुर ध्वनि सुनाई देती है। माना जाता है कि जिस भी देवलू को यह आवाज सुनाई देती है, उसे सौभाग्यशाली माना जाता है। स्थित है। इस चामत्कारिक पत्थर को जगती पत्थर के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि प्राचीन समय में भगवान लक्ष्मीनारायण कमल फूल से प्रकट होकर लाहौर दिशा से होकर दिल्ली में विराजमान हुए। कुछ समय बीतने के बाद वहां से कांगड़ा, चम्बा व लाहौल होकर कुल्लू पहुंचे थे तथा इसके बाद बंजार घाटी के कलवारी में स्थित जगती पत्थर में विराजमान हुए थे।
इस चामत्कारिक पत्थर की खासियत यह है कि घाटी के अन्य इलाकों के देवी-देवता जब दूसरे हारियान क्षेत्र में प्रवेश करते हुए इस रास्ते से गुजरते हैं तो दैवीय शक्ति के कारण देवी-देवताओं के देव रथ अपने आप चामत्कारिक पत्थर की ओर आकर्षित होकर इसके आगे शीश झुकाते हैं। इस भव्य देव मिलन को देखकर हारियान भी हैरान रह जाते हैं। हारियान क्षेत्र के दर्जनों देवी-देवता जब तक इस जगती पत्थर के पास जाकर शीश नहीं झुकाते हैं तब तक भगवान लक्ष्मीनारायण के देव रथ के साथ मिलन नहीं होता है।








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Infact, good information.