एक बार एक बंदर को उदासी के कारण मरने की इच्छा हुई, तो उसने एक सोते हुए शेर के
कान खींच लिये। शेर उठा और गुस्से से दहाड़ा-“किसने किया ये सब.?
किसने अपनी मौत बुलायी है..?”
बंदर: मैं हूँ महाराज। दोस्तो के अभाव में अत्याधिक उदास हूँ, मरना चाहता हूँ, आप मुझे खा लीजिये।
शेर ने हँसते हुए पूछा- “मेरे कान खीँचते हुए तुम्हें किसी ने देखा क्या..?”
बंदर: नहीं महाराज…
शेर: ठीक है, एक दो बार और खीँचो, बहुत ही अच्छा लगता है।”







