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    Home»खबर कोर्ट से

    आजमगढ़ में युवक को 23 साल बाद मिला इंसाफ: कस्टोडियल डेथ केस में रिटायर्ड इंस्पेक्टर को उम्रकैद, जुर्माना 1.05 लाख!

    ShagunBy ShagunFebruary 4, 2026Updated:February 4, 2026 खबर कोर्ट से No Comments3 Mins Read
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    Justice after 23 years in Azamgarh: Retired inspector sentenced to life imprisonment and fined Rs 1.05 lakh in custodial death case!
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    बैटरी चोरी के झूठे केस में हरिलाल यादव को थाने में पीटा-गोली मारी; मुलायम सरकार में CBCID जांच, अब जिला कोर्ट ने सुनाई सजासोशल मीडिया पर ‘कानून के हाथ लंबे’ की तारीफ

    आजमगढ़: 23 साल पुराने क्रूर कस्टोडियल डेथ मामले में न्याय हुआ! जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय की कोर्ट ने रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर जैनेन्द्र कुमार सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 1 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

    घटना 29 मार्च 2003 की है रानी की सराय थाने में बैटरी चोरी के केस में हरिलाल यादव को कस्टडी में लिया गया। थानेदार जैनेन्द्र के निर्देश पर दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने उसे लाठियों से बुरी तरह पीटा, फिर गोली मारकर हत्या कर दी। मुलायम सिंह यादव सरकार ने मामले की CBCID से जांच कराई, जिसमें दोनों दोषी पाए गए। ट्रायल के दौरान दरोगा की मौत हो गई, जबकि जैनेन्द्र अब रिटायर्ड थे लेकिन कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया।

    क्या था आजमगढ़ कस्टोडियल डेथ (हरिलाल यादव हत्याकांड) पूरा मामला:

    • 29 मार्च 2003 को बैटरी चोरी के नाम पर थाने में पीटा-गोली मारी;
    • 23 साल बाद रिटायर्ड इंस्पेक्टर को उम्रकैद
    • CBCID जांच से खुलासा, बेटे के सामने हुई क्रूर हत्या

    यह क्रूर कस्टोडियल डेथ आजमगढ़ का मामला 29 मार्च 2003 का है। जहां रानी की सराय थाने में बैटरी चोरी के एक मामूली आरोप में एफसीआई कर्मचारी हरिलाल यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया। तत्कालीन थानाध्यक्ष (थानेदार) जैनेन्द्र कुमार सिंह (तब इंस्पेक्टर) के निर्देश पर हेड कांस्टेबल/दारोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने पहले लाठियों से बुरी तरह पीटा, फिर गोली मार दी, जिससे मौके पर ही हरिलाल की मौत हो गई।

    मृतक के बेटे जितेंद्र यादव ने नगर कोतवाली में FIR दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने बताया कि वे रात में पिता के लिए खाना लेकर थाने पहुंचे थे और उनके सामने ही थानेदार के इशारे पर गोली चलाई गई। घटना की गंभीरता देखते हुए मुलायम सिंह यादव सरकार ने सितंबर 2003 में जांच CBCID को सौंप दी। CBCID की जांच में दोनों पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। फरवरी 2005 में चार्जशीट दाखिल हुई।Justice after 23 years in Azamgarh: Retired inspector sentenced to life imprisonment and fined Rs 1.05 lakh in custodial death case!

    ट्रायल के दौरान दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह की मौत हो गई, जबकि जैनेन्द्र कुमार सिंह (अब रिटायर्ड) पर मुकदमा चला। लंबी सुनवाई के बाद 4 फरवरी 2026 (या हालिया तारीख पर) जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय की कोर्ट ने जैनेन्द्र को उम्रकैद (लाइफ इम्प्रिजनमेंट) की सजा सुनाई, साथ ही 1 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

    यह फैसला पुलिस हिरासत में मौत के खिलाफ 23 साल की लड़ाई का नतीजा है जो दिखाता है कि इंसाफ देर से सही, लेकिन मिलता जरूर है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “कानून के हाथ लंबे” और “वर्दी के नशे की सीख” बता रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर फैसले की जोरदार सराहना हो रही है।

    यूजर कपिल गौर ने लिखा: “वर्दी के नशे में खुद को खुदा समझने वालों के लिए सीख… 23 साल बाद परिवार को इंसाफ मिला, कानून के हाथ सच में लंबे हैं।”

    आबूर रहमान ने कहा: “मजलूम की आह अर्श तक जाती है, गरीब की हाय नहीं लेनी चाहिए।”

    जबकि ह्यूमन बीइंग ने लिखा: “न्याय में देर हुई, लेकिन हुआ… ऐसे अपराधियों को बीच चौराहे पर भून देना चाहिए।”

    वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://x.com/i/status/2019033438502932711

    बता दें कि यह फैसला पुलिस कस्टडी में मौत के खिलाफ लड़ाई में मील का पत्थर साबित हो रहा है जो दिखाता है कि इंसाफ कितना भी देर से क्यों न आए, मिलता जरूर है!

    Shagun

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