प्रेम और परंपरा का विशेष संगम
करवा चौथ का त्योहार, जो पति-पत्नी के बीच अटूट बंधन का प्रतीक है, कल यानी 10 अक्टूबर को पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आधारित यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए वर्ष का सबसे भावुक और सौंदर्यपूर्ण पर्व है। इस बार तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम था – कुछ पंचांगों में 9 अक्टूबर का उल्लेख था, लेकिन उदय तिथि के अनुसार 10 अक्टूबर को ही व्रत रखा जाएगा।
पंचांग के मुताबिक, चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर रात 10:54 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर शाम 7:38 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 से 7:11 बजे तक है, जबकि चंद्रोदय का समय शहरों के अनुसार भिन्न है – दिल्ली-एनसीआर में रात 8:15 बजे के आसपास।

इस वर्ष करवा चौथ की तैयारी में महिलाएं पहले से ही जोशोखरोश में जुटी हैं। सोशल मीडिया पर #KarwaChauth2025 और #करवाचौथ_तैयारी जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां सुहागिनें अपनी मेहंदी डिजाइन्स, साड़ी शॉपिंग और पूजा सामग्री की लिस्ट शेयर कर रही हैं। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में बाजारों में रौनक छाई हुई है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सोलह श्रृंगार किट्स की बिक्री में 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
तैयारी का स्वरूप: प्राचीन परंपरा में आधुनिक टच
करवा चौथ की तैयारी आमतौर पर एक सप्ताह पहले शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार नवरात्रि के समापन के ठीक बाद होने से उत्साह दोगुना है। महिलाएं अभी से निर्जला व्रत के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हो रही हैं। मुख्य तैयारी के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:सोलह श्रृंगार और सज्जा: सुबह से ही महिलाएं स्नान कर चंदन-इत्र लगाती हैं। बिंदी, काजल, मेहंदी, चूड़ियां, बिछिया, महावर और नथ जैसी वस्तुओं से श्रृंगार पूरा होता है। नोएडा के सेक्टर 122 में जय हिंद सेवादार समिति द्वारा आयोजित मुफ्त मेहंदी कैंप में 200 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया, जहां पारंपरिक अरेबिक डिजाइन्स के साथ चंद्रमा और करवा माता के प्रतीक वाली मेहंदी लगवाई गई।
सोशल मीडिया पर एक नई दुल्हन पूनम ने अपनी पहली करवा चौथ की तैयारी शेयर की, जहां वे सलाह मांग रही हैं- “क्या क्या तैयारी करूं, ये नहीं जानती!”
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में महिलाएं लाल या हरे रंग की साड़ियां और लहंगे खरीद रही हैं, जो प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।
पूजा सामग्री संग्रह: करवा (मिट्टी का छोटा घड़ा), सिंदूर, चंदन, फूल, 13 प्रकार के मेवे से भरी थाली और छलनी जैसी वस्तुओं की खरीदारी जोरों पर है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बाजारों में करवा माता की मूर्तियां और विशेष पूजा किट्स उपलब्ध हैं।
महिलाएं शाम को एकत्रित होकर करवा माता, शिव-पार्वती, गणेश जी और चंद्रमा की पूजा करेंगी। कथा सुनने की परंपरा भी जीवंत है, जहां व्रत की महिमा का वर्णन किया जाता है।
सरगी और व्रत की योजना: सास द्वारा दी जाने वाली सरगी – जिसमें फल, मेवे, सेवई और मिठाई होती है – सुबह सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाती है। महिलाएं हल्का व्यंजन जैसे खीर या हलवा तैयार कर रही हैं। व्रत के दौरान आरामदायक कपड़े पहनने और हल्की सैर करने की सलाह दी जा रही है, ताकि निर्जला व्रत सहज रहे।
आधुनिक बदलाव: पारंपरिक व्रत के साथ योग और मेडिटेशन को शामिल किया जा रहा है। कई महिलाएं वर्चुअल कथा सेशन जॉइन कर रही हैं। हरियाणा की सुमन सैनी ने नारायणगढ़ में आयोजित समारोह में कहा, “यह पर्व न केवल व्रत है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को संजोने का माध्यम है।”
महत्व और परंपरा: प्रेम की अमर कथाकरवा चौथ का उल्लेख स्कंद पुराण और महाभारत में मिलता है, जहां द्रौपदी ने इस व्रत से पांडवों की रक्षा की थी। व्रत से पति की दीर्घायु, वैवाहिक सुख और संतान प्राप्ति की कामना की जाती है। चंद्रोदय पर छलनी से चांद देखना और फिर पति के चेहरे से दर्शन करना – यह रस्म भावुकता से भरी होती है। व्रत पारण के बाद विशेष भोजन जैसे पूरियां, सब्जी, हलवा और कद्दू की खीर परोसी जाती है।
इस वर्ष शुभ योग बन रहे हैं, जो व्रत को और फलदायी बनाएंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, शुक्रवार होने से प्रेम संबंध मजबूत होंगे।
एक नजर में करवा चौथ 2025 की कुंजी जानकारियां

करवा चौथ उत्सव का संदेश : करवा चौथ केवल व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का उत्सव है। महिलाओं की यह तैयारी न केवल परंपराओं को जीवंत रखती है, बल्कि आधुनिक जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। सभी सुहागिनों को हार्दिक शुभकामनाएं- आपका व्रत सिद्ध हो, जीवन सुखमय रहे। जय करवा माता!







