कतर्नियाघाट बहराइच: ग्रामीणों में दहशत, विशेषज्ञों का दावा लापता लोगों का कोई चमत्कार न होने तक सुरक्षित बचना मुश्किल
बहराइच, 30 अक्टूबर 2025 : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में बुधवार देर शाम कौड़ियाला नदी में हुए नाव हादसे ने अब एक भयानक रूप ले लिया है। यात्रियों से भरी नाव के पलटने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो चुकी है, जबकि 8 लोग 28 घंटे बाद भी लापता हैं। सबसे सनसनीखेज खुलासा यह है कि यह नदी 1200 से अधिक मगरमच्छों और घड़ियालों का अड्डा बनी हुई है, जहां बचाव दल को अब ‘मौत के त्रिकोण’ मगरमच्छ, घड़ियाल और जंगली हाथियों से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों में दहशत फैल गई है, और विशेषज्ञों का कहना है कि लापता लोगों का कोई चमत्कार न होने तक सुरक्षित बचना मुश्किल है।
एक बुजुर्ग महिला रोते हुए बोलीं, “हमारा बेटा नदी में कहीं फंस गया होगा, लेकिन ये मगरमच्छ… भगवान ही मालिक हैं।” गांववालों ने बैराज गेट खोलने की मांग की है ताकि बहाव कम हो और सर्च आसान बने।
ट्रांस-गेरुआ क्षेत्र के घने जंगलों में बसे भारत के अंतिम गांव भरथापुर के ग्रामीण खैरटिया बाजार से खरीदारी कर लौट रहे थे। नाव में 22 लोग सवार थे, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। अचानक तेज बहाव और एक पुराने पेड़ की टहनी से टकराने पर नाव पलट गई। 65 वर्षीय रामजेई पत्नी मटरू का शव नदी किनारे बरामद हुआ, लेकिन बाकी लापता लोगों की तलाश अब जानलेवा हो चुकी है। वन विभाग के ताजा सर्वे के अनुसार, गेरुआ और कौड़ियाला नदी में करीब 600 घड़ियाल और 1200 से ज्यादा मगरमच्छ विचरण कर रहे हैं। ये खूंखार जीव रात के अंधेरे में और सक्रिय हो जाते हैं, जिससे बचाव अभियान पर खतरा मंडरा रहा है।
रात 2 बजे एनडीआरएफ की 50 सदस्यीय टीम, एसएसबी, एसडीआरएफ और गोताखोरों के साथ घटनास्थल पहुंचे। पूरी रात 5 किलोमीटर के दायरे में सर्च ऑपरेशन चला, लेकिन भोर होते ही एक नया संकट खड़ा हो गया। सुबह 4 बजे जब टीमें फिर सक्रिय हुईं, तभी एक मदमस्त जंगली हाथी ने अचानक हमला बोल दिया। आईजी अमित पाठक के नेतृत्व वाली टीम के दो अधिकारी लेखपाल संजय सिंह और सहायक लेखपाल आदर्श कुमार पर हाथी ने डटकर वार किया। सिंह और कुमार को हाथी ने दौड़ा लिया, जबकि आदर्श गिर पड़े और उन्हें पैरों पर गंभीर चोटें आईं। बाकी सदस्य किसी तरह जंगल की झाड़ियों में छिपकर बच निकले। स्थानीय वन अधिकारी ने बताया, “यह इलाका हाथियों का गलियारा है। तीन हाथी हाल ही में यहां मादा की तलाश में भटक रहे हैं, और हादसे की अफरा-तफरी ने उन्हें उकसा दिया।”
देवी पाटन मंडल के कमिश्नर शशि भूषण लाल और आईजी पाठक ने देर रात मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। सीएम योगी आदित्यनाथ ने तुरंत निर्देश दिए हैं कि सभी संसाधन लगाकर लापता लोगों को खोजा जाए, लेकिन मगरमच्छों के खतरे के चलते ड्रोन और थर्मल कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नदी किनारे परिजनों का मातम थमने का नाम नहीं ले रहा। एक बुजुर्ग महिला रोते हुए बोलीं, “हमारा बेटा नदी में कहीं फंस गया होगा, लेकिन ये मगरमच्छ… भगवान ही मालिक हैं।” गांववालों ने बैराज गेट खोलने की मांग की है ताकि बहाव कम हो और सर्च आसान बने।
यह हादसा न केवल मानवीय त्रासदी है, बल्कि जंगलों और नदियों के बीच बसते ग्रामीणों की मजबूरी को भी उजागर करता है। यहां पक्के पुल या सड़कें बनाने पर वन्यजीव संरक्षण कानून रोक लगाता है, जिससे नाव ही एकमात्र सहारा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर 48 घंटे के अंदर लापता लोग न मिले, तो मगरमच्छों का शिकार होने का खतरा बढ़ जाएगा। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। कोई भी नाव न चलाए। फिलहाल, बचाव टीमें हेलीकॉप्टर सपोर्ट के इंतजार में हैं, जबकि पूरा इलाका सन्नाटे और डर के साये में डूबा हुआ है।







