आज जब हम घटते जल संसाधनों की समस्या से जूझ रहे हैं तो पांच सौ साल पुराना ऐतिहासिक शेरशाह सूरी तालाब जल संरक्षण की सीख देता है। यह तालाब मिसाल है कि आखिर कैसे सामूहिक प्रयास से सबकुछ बदला जा सकता है। बिना किसी सरकारी मदद के क्षेत्रीय लोगों ने इस तालाब को जीवित रखा है। इस तालाब की सुंदरता ही है कि रोज सैकड़ों लोग यहां घूमने आते हैं।
चकेरी के शंकर नगर स्थित शेरशाह सूरी तालाब भी अन्य तालाबों की तरह अपना अस्तित्व खोता जा रहा था। 12 साल पहले क्षेत्रीय लोगों ने इसे बचाने और संवारने का बीड़ा उठाया। शेरशाह सूरी तालाब संरक्षण समिति बनाई गई। बूढ़े, बच्चे, जवान और महिलाओं, सभी ने यहां पर पौधरोपण करने के साथ ही तालाब में मछलियां व कछुए पालना शुरू किया। तालाब के निर्माण के लिए खुद आपस में धन एकत्र करने के साथ ही श्रमदान किया। जर्जर हो चुकी तालाब की बाउंड्री को बनवाया गया। आसपास बेरीकेडिंग कर लोहे की जाली लगाई गई। सामूहिक रूप से तालाब की देखभाल शुरू की। यहां आने वालों को जल संरक्षण की अपील भी करते हैं कि अगर अभी समय रहते नहीं चेते तो भविष्य में पीने के एक-एक बूंद के लिए जूझना पड़ेगा। तालाब व कुएं सुरक्षित नहीं रहेंगे तो भविष्य भी सुरक्षित नहीं है। तालाब के हित में काम करेंगे तो भविष्य सुरक्षित रहेगा। सार्थक प्रयास का नतीजा ही है कि तालाब में पानी लबालब भरा रहता है। तालाब से जुड़े आसपास के इलाके का भूगर्भ जल स्तर कभी कम नहीं हुआ है। तालाब की सुंदरता इस कदर आकर्षित करती है कि सुबह से शाम तक यहां पर लोग परिवार सहित घूमने आते हैं। कोई मछलियां को दाना देता है तो कोई बतख व खरगोश के साथ खेलता है। बिना किसी सरकारी विभाग की मदद के लोगों ने तालाब को बचाकर रखा है।
मछलियों के मरने से परेशान लोग
यहां पर हर साल मछलियां मरती हैं। इससे समिति से जुड़े लोग परेशान रहते हैं। किसी भी सरकारी विभाग या विशेषज्ञ ने इस बारे में कभी कोई मदद नहीं की। समिति के लोग चाहते हैं कि सरकार इधर ध्यान दे दे तो तालाब की स्थिति और बेहतर हो सकती है।
क्या कहते हैं लोग
– यह हमारी धरोहर है। इसे बचाना व संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। यह तालाब व यहां के जीव-जंतु हमारे परिवार के सदस्य की तरह हैं। तालाब रहेगा तो हमारा भविष्य भी संवरेगा, वरना संकट गहरा सकता है।
– नरेंद्र सिंह अध्यक्ष शेरशाह सूरी तालाब समिति
– तालाब के आसपास मोबाइल टावर हट जाएं तो यहां के जीव-जंतुओं पर विपरीत प्रभाव न पड़े। जीवन के अंतिम क्षण तक इस तालाब की भलाई के लिए ही काम करना है।
– एसबीएस चौहान, रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी कछुआ तालाब को बचाने जागा महकमा
पनकी क्षेत्र में स्थित कछुआ तालाब को बचाने के लिए नगर निगम का अमला जागा है। नगर निगम ने तालाब को बचाने का प्रस्ताव तैयार किया और शासन को भेजा। स्वीकृति मिलते ही नगर निगम ने दो करोड़ रुपये से काम शुरू करा दिए है। अब तक 60 फीसद काम हो गया है।







