सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आरक्षण समर्थकों में उत्साह की लहर
नई दिल्ली, 26 सितम्बर 2018: सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण के लाभ के मुद्दे पर बड़ा फैसला देते हुए कहा कि पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलेगा।
सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 2006 में नागराज मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सात सदस्यीय संविधान बेंच को रेफर करने की जरूरत नहीं है। यानि नागराज के फैसले के मुताबिक पदोन्नति में आरक्षण मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने नागराज फैसले में आंकड़ों के आधार पर आरक्षण देने के फैसले को पलटते हुए कहा कि आंकड़े एकत्र करने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आंकड़े एकत्र करने का फैसला इंदिरा साहनी केस के फैसले के उल्टा है।
पिछले 30 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। केंद्र सरकार का कहना था कि 2006 में नागराज मामले में आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला पदोन्नति में आरक्षण दिए जाने में बाधा डाल रहा है। लिहाजा इस फैसले पर फिर से विचार की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा था कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान उनके लिए किया गया है जो वाकई में पिछड़े हैं चाहे वे किसी भी जाति के हों। जिन पीढ़ियों को कुचला गया वे अब नहीं हैं। आरक्षण देते समय हर स्तर पर उसकी जांच जरूरी है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि इस मामले में कई केस लंबित हैं लेकिन किसी भी राज्य ने पिछड़ेपन को लेकर आंकड़ा नहीं दिया है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील शेखर नफड़े ने कहा था कि नागराज के फैसले पर पुनर्विचार करने से पहले कोर्ट को इससे प्रभावित लोगों के बारे में सोचना चाहिए। नफड़े ने कहा था कि अगर प्रतिनिधित्व के नज़रिए से देखना है तो आंकड़े की जरूरत है लेकिन अगर पिछड़ेपन को आधार बनाना है तो उस पर विचार करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि आंकड़े की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा था कि जिन लोगों के साथ हजारों साल से भेदभाव हुए हैं उनके बारे में सोचना जरूरी है।







