नवेद शिकोह
लखनऊ, 27 नवंबर 2018: मौलाना कल्बे जव्वाद सरकार के खिलाफ आरपार के मूड में दिखाई दे रहे हैं। राम मंदिर के पैरोकार वसीम रिजवी के खिलाफ कार्रवाई ना होने से खफा मौलाना की तरफ से पहले ही ऐलान हो चुका था कि यदि वसीम के खिलाफ सरकार ने कदम नहीं उठाये तो मोहर्रम के बाद वक्फ बचाओ आंदोलन सरकार के लिये बड़ी मुसीबत बन सकता है।
मौलाना जव्वाद ने मुख्यमंत्री योगी को घेरने का सिलसिला तेज कर दिया है। हजरत अली संबधित मुख्यमंत्री के बयान के खिलाफ दर्जनों उलमा को साथ लेकर मौलाना जव्वाद ने योगी की कड़ी आलोचना की है। देशभर के उलमा (उलमा-ए-हिन्द) को लामबंद कर शिया अवकाफ की कथित लूटमार के खिलाफ सरकार को घेरने के मूड में नजर आ रहे मौलाना कल्बे जव्वाद।
मालूम हो कि मौलाना पांच बार मुख्यमंत्री योगी से मिलने उनके आवास जा चुके हैं। जहां उन्होंने हर बार राम मंदिर के पैरोकार वसीम रिजवी की शिकायतें की और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। किन्तु सरकार ने मौलाना की एक नहीं सुनी।
बताया जाता है कि मौला अली पर आपत्तिजनक राजनीतिक टिप्पणी करने वाली भाजपा से जुड़े मौलाना जव्वाद के रिश्तेदार और तमाम शिया भाजपा से रिश्ता तोड़ सकते हैं। मौलाना द्वारा मुख्यमंत्री की निंदा करके भाजपा के खिलाफ मुखर होने के बाद शिया भाजपाइयों पर मौलाना का दबाव तेज हो गया है।







