कहते हैं, मन में लगन हो तो आशाओं को पंख लगते देर नहीं लगती। साधनों का अभाव भी किसी प्रतिभा को ज्यादा दिन तक नहीं रोक सकता । नन्ही सुरीली आवाज की राजकुमारी एंजेल की आशाओं की उड़ान कुछ कुछ ऐसी ही है। रायबरेली (उत्तर प्रदेश) के छोटे से कस्बे ऊंचाहार में 2008 में जन्मी एंजेल को मीठे सुर प्रकृति से ही उपहार में मिले । पाँच-छह वर्ष की होने तक वह बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के ही टीवी और मोबाइल पर सुने गीतों को स्कूल और स्थानीय मंचों पर हूबहू गाने और थिरकने लगी थी।
मात्र 11 वर्ष की आयु में एंजेल ने एक्सिस एम एफ आयडल सिंगिंग कंपीटीशन 2018 जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में नार्थ जोन से सेमीफाइनल तक जगह बना ली, दिल्ली में हुई इस प्रतियोगिता में उसके मुक़ाबले सभी उससे बहुत बड़ी आयु (लगभग 65 वर्ष तक) के लोग सम्मिलित थे। अनुभवी गायकों के बीच एक बड़े मंच पर गाने का उसका पहला अनुभव था, फिर भी उसने चौकाने बेहतरीन परफ़ार्मेंस देकर खूब वाहवाही और तालियाँ बटोरी। प्रतियोगिता के जज अनीस मैथ्यू तो उससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होने एंजेल के साथ मंच पर विशेष रूप से एक युगल गीत गाकर उसका उत्साह बढ़ाया और उसे खूब आशीष दिया।

सभी प्रतिभागियों का अनुमान था कि एंजेल प्रतियोगिता के फाइनल टॉप 3 में अवश्य जायेगी, लेकिन आयोजन के गाइडलाइन में किसी तकनीकी दिक्कत के चलते नन्ही एंजेल के बजाय बड़ी उम्र के दूसरे प्रतिभागियों को भेज दिया गया।
एंजेल इस प्रतियोगिता के फाइनल तक तो नहीं जा सकी लेकिन भविष्य की संभावनाओं के द्वार उसके लिए खुलने लगे। उसी वर्ष कुछ ही महीने बाद भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से (दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में) आयोजित संगीत संध्या – आजादी के तराने (एक शाम अटल बिहारी बाजपेयी के नाम) आयोजन में ‘नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ” नामक गीत पर जबर्दस्त प्रस्तुति देते हुए बाल कला रत्न सम्मान और पुरस्कार हासिल करके अपने को साबित कर दिखाया।
इसके बाद पाँचवी कक्षा की पढ़ाई के साथ छिटपुट कार्यक्रमों भी चलते ही रहे। इसी बीच एंजेल को भीलवाड़ा (राजस्थान) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सोशल मीडिया मैत्री सम्मेलन 2019 गायन प्रस्तुति हेतु आमंत्रित किया गया। वहाँ एंजेल की धमाकेदार प्रस्तुति के चलते उसे देश की बड़ी हस्तियों के सामने “विशिष्ट प्रतिभा सम्मान” प्रदान किया गया। इस सम्मान ने एंजेल के आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि किया और उसने गायन में तकनीकी शिक्षा भी लेनी प्रारम्भ की, कोविड19 के लॉकडाउन के दौरान अवसर का लाभ उठाते हुए एंजेल ने ऑन लाइन रहकर पूरा समय संगीत की बारीकियाँ सीखने में बिताया और अब वह प्रयाग संगीत समिति नियमित कि गायन छात्रा के रूप में औपचारिक प्रशिक्षण ले रही है।
इस बीच एक उत्साहजनक खबर और मिली, हुआ यह कि लॉकडाउन के दौरान मुम्बई की एक फिल्म निर्माण संस्था के लिए बॉलीवुड कलाकार सत्यकाम आनन्द प्रतिदिन किसी चर्चित या प्रसिद्ध व्यक्तित्व से एक लाइव चैट सीरियल “मेरे सैनिक मेरे भाई” की प्रस्तुति कर रहे थे। इसमें उसदिन कार्यक्रम अतिथि के रूप में एंजेल के पिता अरविंद कुमार साहू (जो कि प्रसिद्ध बाल साहित्यकार हैं) का साक्षात्कार चल रहा था। इसमें अतिथि के परिवार के सदस्य को भी देश के सैनिकों के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर मिलता था। संयोग से उसमें एंजेल को अवसर मिला तो उसने सैनिकों के लिए फिल्म बॉर्डर के प्रसिद्ध गीत– “संदेशे आते हैं, संदेशे जाते हैं कि तुम कब आओगे” की कुछ पंक्तियाँ लाइव गाकर अपनी भावनाएं बड़े मार्मिक स्वरों में प्रस्तुत की, बिना संगीत के ।
नन्ही एंजेल की सादगी भरी मधुर और सुरीली आवाज से सत्यकाम आनन्द जी इतने प्रभावित हुए कि उसकी गायकी की भूरि-भूरि प्रसंशा करते हुए उन्होने तत्काल अपनी किसी आगामी निर्माणाधीन फिल्म के लिए उसे एक गीत गाने के लिए आमंत्रित कर दिया। इस फिल्म की शूटिंग शीघ्र ही शुरू होने वाली है।
अनेक ऑनलाइन कार्यक्रमों व सोशल मीडिया ने एंजेल की पहुँच दूरदराज़ के श्रोताओं तक आसानी से बढ़ा दी है। उसे अनेक स्थानीय व दूसरे प्रदेशों से भी कार्यक्रमों के आमंत्रण मिलने लगे हैं । किन्तु फिलहाल उसकी रुचि अधिक प्रदर्शन के बजाय संगीत की बारीकियाँ सीखने में ज्यादा है, इसलिए वह चुनिन्दा कार्यक्रम ही कर पाती है। एंजेल स्थानीय डीएवी पब्लिक स्कूल में सातवीं कक्षा की छात्रा है। पढ़ाई में व्यस्तता के बावजूद संगीत में रुचि के चलते वह समय निकालकर नियमित संगीत साधना अवश्य करती है। वह भविष्य में अन्य विषयों की उच्च स्तरीय पढ़ाई के साथ ही संगीत में भी शोध छात्रा व अच्छी गायिका के रूप में महारत हासिल करते हुए नाम कमाना चाहती है । – अरविंद कुमार ‘साहू’







