खुलासा : संतान सुख से वंचित दंपती ने रची साजिश
लखनऊ। कभी- कभी आँखों के सामने ऐसा मंजर घट जाता है जो आँखों के सामने से हटता ही नहीं ! और जब बात मासूमों की हो तो कलेजा चीख उठता है। बता दें कि अलीगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर शनिवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना ने सबको झकझोर दिया, जब तीन साल की मासूम टीना को अगवा कर लिया गया। लेकिन जीआरपी और आरपीएफ की मुस्तैदी ने नन्हीं जान को महज दो दिन में संभल के धनारी थाना क्षेत्र के चतुर्भानपुर गांव से सकुशल बरामद कर लिया। इस घटना ने न केवल पुलिस की तत्परता को उजागर किया, बल्कि एक मार्मिक दृश्य भी सामने लाया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
पांच साल से संतान को तरस रहे दंपती ने रची साजिश
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस पूछताछ में पता चला कि अपहरणकर्ता दंपती, महेश यादव और रुक्मिणी, पांच साल पहले बिहार के दरभंगा में शादी के बंधन में बंधे थे। उनकी एक बेटी हुई, लेकिन जन्म के बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद संतान सुख से वंचित दंपती ने किसी और की बच्ची को अपनाने की साजिश रची। महेश दिल्ली में ठेला लगाता था और पत्नी के साथ पैतृक गांव घूमने आया था। अलीगढ़ स्टेशन से दिल्ली लौटते वक्त उनकी नजर टीना पर पड़ी, जो अपने माता-पिता के साथ थी। मौका देखकर उन्होंने बच्ची को अगवा कर लिया।
200 सीसीटीवी कैमरों ने दिखाई राह, और फिर पुलिस की मेहनत रंग लाई
टीना के गायब होने की खबर मिलते ही जीआरपी इंस्पेक्टर संदीप तोमर और आरपीएफ पोस्ट कमांडर अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गईं। 200 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालने और रिक्शा-ऑटो चालकों से पूछताछ के बाद पुलिस ने महेश और रुक्मिणी को धनारी के चतुर्भानपुर से गिरफ्तार कर लिया। बच्ची को सकुशल बरामद करने वाली टीम को एसपी रेलवे अभिषेक वर्मा ने 10 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा की। दोनों आरोपियों को विधिक कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया गया।
मासूम का अपहरणकर्ता से अनोखा लगाव, मां की गोद में लौटते ही चुप हुई
टीना की बरामदगी के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने सभी को भावुक कर दिया। चंद घंटों में ही मासूम टीना अपहरणकर्ता रुक्मिणी से इस कदर घुल-मिल गई थी कि वह उसे ही अपनी मां समझने लगी थी। जब पुलिस ने उसे रुक्मिणी की गोद से लिया, तो वह जोर-जोर से रोने लगी। महिला पुलिसकर्मियों के तमाम प्रयासों के बावजूद वह चुप नहीं हुई। आखिरकार, रुक्मिणी ने उसे फिर से गोद में लिया, तो वह तुरंत शांत होकर उसके गले से लिपट गई। बाद में मां उर्मिला और पिता करन प्रकाश के पास पहुंचने पर भी टीना का रोना बंद नहीं हुआ। मां उर्मिला ने आंसुओं के बीच कहा, “मेरी गुड़िया रानी मेरे पास आ गई।” रात में ही बच्ची को माता-पिता को सौंप दिया गया।”
करन प्रकाश और उर्मिला ने कहा ”पुलिस न होती तो शायद मेरी बेटी न मिलती”
करन प्रकाश और उर्मिला ने पुलिस का दिल से आभार जताया। करन ने कहा, “पुलिस की मेहनत और तत्परता के बिना हमारी टीना शायद हमें कभी न मिल पाती।” इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की जवाबदेही और मानवता को सामने लाया, जिसने एक मासूम को उसके परिवार से मिला दिया।







