लखनऊ, 4 जुलाई : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैयार बिजली निजीकरण के मसौदे पर विवाद गहरा गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 131(2) और 133 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विद्युत नियामक आयोग में अवमानना प्रस्ताव दाखिल किया है।
परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर मसौदे को असंवैधानिक करार देते हुए इसे सरकार को वापस करने और अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मांग की।
वर्मा ने बताया कि मसौदा धारा 131(2) का उल्लंघन करता है, जिसमें बिजली कंपनियों के शेयर या एसेट के निजीकरण से पहले राजस्व उपयोगिता (रेवेन्यू पोटेंशियल) का आकलन अनिवार्य है। इसके बिना 42 जनपदों के निजीकरण का मसौदा अवैध है। उन्होंने एनर्जी टास्क फोर्स के अंतरण स्कीम संबंधी निर्णय को भी धारा 133 के विपरीत बताया, क्योंकि यह अधिकार केवल राज्य सरकार को है।
परिषद ने पावर कॉरपोरेशन और इसके ट्रांजैक्शन एडवाइजर पर निजी कंपनियों के पक्ष में मसौदा तैयार करने का आरोप लगाया, इसे वित्तीय घोटाला करार देते हुए सीबीआई जांच की मांग की। वर्मा ने आयोग से मसौदे को खारिज करने और संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया, चेतावनी दी कि अन्यथा परिषद न्यायालय का रुख करेगी।







