4000 करोड़ के आधुनिकीकरण प्लान पर मंथन, प्रमुख मार्गों पर होंगी भूमिगत लाइनें
लखनऊ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ में बिजली आपूर्ति को और मजबूत बनाने के लिए 28 फरवरी 2026 को उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। उनके निर्देश पर हुई इस बैठक में ओएसडी के.पी. सिंह, विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में बताया गया कि शहर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए बिजली ढांचे के व्यापक आधुनिकीकरण के लिए करीब 4000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
क्या होंगे बड़े बदलाव?
▪ प्रमुख सड़कों पर अंडरग्राउंड केबल
पहले चरण में पांच विधानसभाओं के मुख्य मार्गों पर बिजली लाइनों को भूमिगत किया जाएगा। ट्रांसफार्मरों का सौंदर्यीकरण और सड़कों के बीच लगे खंभों को व्यवस्थित स्थान पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा गया।
▪ आरडीएसएस योजना से लाइन लॉस में कमी
केंद्र की आरडीएसएस योजना के तहत बिजली वितरण प्रणाली मजबूत की जा रही है। एबीसी केबल लागू होने के बाद बिजली चोरी घटी है और जनवरी तक लाइन लॉस करीब 8 प्रतिशत तक सीमित किया गया है।
▪ बढ़ते लोड से निपटने की तैयारी
शहर में तेजी से बढ़ते बिजली लोड को देखते हुए “एन-1 मानक” लागू किया जा रहा है, ताकि एक लाइन बंद होने पर भी सप्लाई बाधित न हो। 996 किमी नेटवर्क पर काम जारी है और 400 केवी लाइनों की क्षमता 700 एम्पीयर तक बढ़ाई जा रही है।
▪ सब-स्टेशन और ट्रांसफार्मर बढ़ेंगे
फिलहाल 102 पावर ट्रांसफार्मर कार्यरत हैं। 48 सब-स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 54 करने की योजना है।
▪ क्षेत्रीय स्तर पर राहत
सीतापुर और बाराबंकी में 400 केवी स्टेशन निर्माणाधीन हैं। इनके चालू होने से लखनऊ पर लोड कम होगा।
बता दें कि बैठक में तय हुआ कि अंडरग्राउंड केबलिंग और अन्य कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना 30 अप्रैल तक तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। लक्ष्य है कि लखनऊ को आधुनिक और सुव्यवस्थित बिजली ढांचा उपलब्ध कराना।







