नई दिल्ली/शागुन न्यूज इंडिया, 13 फरवरी 2026: इस वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 (रविवार) को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आधारित यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर, शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि चढ़ाकर और रात्रि जागरण के साथ विधि-विधान से पूजा करते हैं।
तिथि और समय विवरण (द्रिक पंचांग एवं प्रमुख स्रोतों के अनुसार):
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 5:04 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 5:34 बजे
- चूंकि रात्रि में चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी और निशिता काल इसी तिथि में पड़ता है, इसलिए महाशिवरात्रि मुख्य रूप से 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी। व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा, जबकि पूजा और जागरण रात भर चलेगा।

शुभ योग और नक्षत्र:
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:30 बजे से शाम 7:48 बजे तक बना रहेगा, जो सभी कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
उत्तराशाड़ा नक्षत्र शाम तक रहेगा, उसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा, जो 16 फरवरी शाम 8:45 बजे तक रहेगा। श्रवण नक्षत्र में शिव पूजन विशेष फलदायी होता है।
अन्य दुर्लभ योग: शिव योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग सहित कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो पूजा को और प्रभावशाली बनाते हैं। कुछ स्रोतों में बुधादित्य, शुक्रादित्य जैसे योग भी उल्लेखित हैं।
महाशिवरात्रि पूजा के प्रमुख मुहूर्त (नई दिल्ली के अनुसार):
निशिता काल पूजा (सबसे महत्वपूर्ण): 16 फरवरी 2026, रात्रि 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (लगभग 51-52 मिनट) – यह मध्यरात्रि का समय है, जब शिव की आराधना सर्वोत्तम फल देती है।
रात्रि चार प्रहर पूजा:
प्रथम प्रहर: 15 फरवरी, शाम 6:11 बजे से 9:23 बजे तक
द्वितीय प्रहर: 9:23 बजे से 12:35 बजे (16 फरवरी तक)
तृतीय प्रहर: 12:35 बजे से 3:47 बजे (16 फरवरी)
चतुर्थ प्रहर: 3:47 बजे से 6:59 बजे (16 फरवरी)
प्रदोष काल पूजा: शाम 6:00 बजे से 8:38 बजे तक (विशेष अभिषेक के लिए शुभ)
पारण समय (व्रत खोलने का): 16 फरवरी, सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक
जलाभिषेक के अतिरिक्त शुभ मुहूर्त (सुबह और शाम):सुबह: चार (8:24-9:48), लाभ (9:48-11:11), अमृत (11:11-12:35)
शाम: शुभ (6:11-7:47), अमृत (7:47-9:23), चार (9:23-10:59)
पूजा विधि संक्षेप में:
शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, आकुष, धतूरा, भांग चढ़ाएं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। रात्रि जागरण, कीर्तन और ध्यान से महादेव को प्रसन्न किया जाता है।यह पर्व आध्यात्मिक जागरण, पाप मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का अवसर है। भक्तों से अपील है कि शुभ मुहूर्त में पूजा करें और परिवार सहित शिव भक्ति में लीन रहें। हर हर महादेव!







