आयुष्मान खुराना हिंदी सिनेमा में फ़ारूक़ शेख़ और अमोल पालेकर जैसे मध्यवर्गीय दिखते नायकों की अनुपस्थिति से ख़ाली हुई जगह के लिए एक अच्छे विकल्प की तरह उभर रहे हैं। हालाँकि उन्हें अभी फ़ारूक़ शेख़ और अमोल पालेकर दोनों के काम की गहराई तक पहुँचना बाक़ी है लेकिन अपनी फ़िल्मों के चुनाव और अभिनय से वो उसी तरह के मुहावरे को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं। चाहे विकी डोनर हो, शुभ मंगल सावधान, दम लगा के हइशा या बरेली की बर्फ़ी, आयुष्मान खुराना ने नये दौर के शहरी-कस्बाई मध्यवर्गीय युवा के अलग अलग शेड्स अब तक सफलतापूर्वक दर्शाए हैं।
अंधाधुन के बाद बधाई हो भी उनकी इसी यात्रा का ताज़ा पड़ाव है। मध्यवर्गीय परिवार में शादी लायक बेटे वाले घर में जब ‘नये मेहमान’के आने की ख़बर मिलती है तो परिवार से लेकर समाज तक में किस तरह की प्रतिक्रियाएँ होती हैं, फिल्म का विषय मोटे तौर पर यही है। बधाई हो इस त्यौहारी मौसम में एक धाँसू, पैसा वसूल फिल्म है।
आयुष्मान के अलावा दंगल और हाल में आई पटाखा की सानिया मल्होत्रा, नीना गुप्ता का काम भी बढ़िया है।दादी की भूमिका में सुरेखा सीकरी ने टीवी सीरियल न आना इस देस लाडो के अपने किरदार सेे हट कर मज़ेदार काम किया है।
- अमिताभ श्रीवास्तव







