और इधर यूपी के फैंस और रिश्तेदारों को इन्तजार है बिग बी का
बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन एक ऐसा व्यक्तित्व है, जिसके प्रशंसक सारी दुनिया में मिल जायेंगे। उत्तर प्रदेश में तो उनके चाहने वालों की संख्या असीमित है। यहाँ का प्रतापगढ़, इलाहाबाद और रायबरेली तो उनका दीवाना ही रहा है। प्रतापगढ़ में उनके पुरखे रहते थे, इलाहाबाद में उनका जन्म हुआ था और रायबरेली में उनके रिश्तेदार हैं। तीनों जिले एक दूसरे से सटे हुए हैं और इलाहाबाद से अधिकतम डेढ़ घन्टे की दूरी पर ही हैं।
इन तीनों में से अमिताभ बच्चन का लगाव इलाहाबाद से ही सर्वाधिक रहा। वे यहाँ से चुनाव भी लड़े और जीते। लेकिन 77 वर्षीय यह महानायक आज तक वहाँ से एक घन्टे की दूरी पर प्रतापगढ़ जनपद में स्थित अपने पैतृक गांव बाबू पट्टी कभी नही गये। उन्हें अपने गाँव में देखने की उनके गाँव वासियों की इच्छा सदैव उनके मन में ही दबी की दबी रह गयी।

लेकिन आज अचानक एक सुखद और आश्चर्यजनक खबर मिली कि बाबू पट्टी गांव में पुरखों की सरज़मीं पर माथा टेकना चाहते हैं महानायक अमिताभ बच्चन । इतना ही नहीं वे लड़कियों के लिये गाँव में एक स्कूल खोलने की भी तैयारी में हैं। गांव के लोग हैं बेहद उत्साहित हैं। कारण वही कि आज 77 साल के हो चुके अमिताभ अपने जीवन में कभी भी अपने पैतृक गांव बाबू पट्टी नहीं गए।
आगे बात करुँ तो मेरा जन्म भी प्रतापगढ जनपद में ही हुआ और बाबूपट्टी गाँव भी मेरे यहाँ से अधिक दूर नही था। यह बात मुझे अपने छात्र जीवन में तब पता चली थी जब वे इलाहाबाद से चुनाव लड़ रहे थे। संयोग देखिये कि अब मैं अपने कार्य क्षेत्र रायबरेली जनपद में जिस सड़क पर रहता हूँ उसे अकोढ़िया रोड कहा जाता है। यह रोड अकोढ़िया नामक उस गाँव तक जाती है, जहाँ अमिताभ बच्चन की बुआ अर्थात उनके पिता कविवर हरिवंश राय बच्चन जी की सगी बहन ब्याही थी और उनके वंशज आज भी वहाँ रहते हैं।
पिछ्ले से पिछले लोक सभा चुनाव की बात है। सपा सांसद अमर सिंह और अमिताभ की पत्नी जया बच्चन आदि चुनाव प्रचार के लिये रायबरेली के कुछ क्षेत्रों में आये थे। तब जाने कैसे अकोढ़िया गाँव के लोग बड़े उत्साहित हो गये थे कि (सम्भवत:) जया बच्चन जी उनके गाँव पाँच मिनट के लिये ही सही जरुर आयेंगी। लेकिन जैसा कि बड़े लोगों के साथ होता है, वे अकोढ़िया से मात्र दो किलोमीटर की दूरी से गुजरने वाले इलाहाबाद हाईवे से होती हुई आगे बढ़ गई और पलक पाँवड़े बिछाये गाँव वाले सूनी डगर को ताकते ही रह गये।
अब एक बार फिर बाबूपट्टी के लोगों की तरह अकोढ़िया गाँव वालों को भी आशा जगी है कि वयोवृद्ध अमिताभ बच्चन जी शायद इसी परम्परा में अपने पिता की लाडली बहन और अपनी प्रिय बुआ के इस गाँव की भी खबर ले लें और इस ग्राम के वासियों को भी अपने दर्शन देकर धन्य करें। हम भी इस उम्मीद के फलने फूलने की दुआ करेंगे, क्योंकि हम भी उस दिन जया बच्चन जी की प्रतीक्षा में अपने परिचित अकोढ़िया गाँव के लोगों के साथ ही खड़े थे। – अरविंद कुमार साहू







