ख़राब परफार्मेन्स करने वाले मिनिस्टर्स को बहार का रास्ता दिखेंगें PM

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‘मोदी के करीबियों की मानें तो वो राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज के अहम मंत्रालयों के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट हैं इसीलिये इनमें किसी तरह के फेर बदल की संभावना नहीं है’


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले दो दिन में अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं। लगभग सवा तीन साल पुरानी मोदी सरकार का यह सबसे बड़ा और अहम फेरबदल होगा। दरअसल मोदी अब अपने सारे फैसले 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर कर रहे हैं। मोदी चाहते हैं कि सरकार का हर फैसला जनता के बीच ऐसा संदेश पहुंचाये कि बीजेपी की छवि और भी निखरती जाय।

नोटबंदी, जीएसटी, सर्जिकल अटैक और तीन तलाक समेत कई मुद्दों पर सरकार जनता का दिल जीतने में पूरी तरह कामयाब रही है। अब सबसे ज्वलंत विषय चीन के साथ टकराव का है जिसपर सरकार कड़ा रुख अख्तियार कर देश की जनता का दिल जीतना चाहेगी। ऐसे में नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल का स्वरूप ऐसा रखना चाहेंगे जो हर मोर्चे पर न सिर्फ पूरी तरह एकाउंटेबल हो बल्कि सरकार की ब्रांड इमेज बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाये। मोदी के करीबियों की मानें तो वो राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज के अहम मंत्रालयों के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट हैं इसीलिये इनमें किसी तरह के फेर बदल की संभावना नहीं है। एक चौथा अहम मंत्रालय है रक्षा मंत्रालय जो मनोहर पर्रिकर के गोवा का मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही खाली पड़ा हुआ है।

चीन और पाकिस्तान के साथ वर्तमान और भविष्य के संबंधों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मोदी रक्षा मंत्री के तौर पर किसी ऐसे व्यक्ति को बैठाना चाहेंगे जो सटीक और कड़े फैसले लेने से हिचके नहीं और साथ ही संघ के मापदंड पर भी खरा उतरे। ऐसे में संघ विचारक और राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे का नाम इस पद के लिये र्चचा में आगे है। रेलमंत्री सुरेश प्रभु पर गाज गिरती इसके पहले ही उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। यह पद भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की झोली में जा सकता है। सड़क और परिवहन के मामले में गडकरी का काम सराहनीय रहा है। खासतौर पर उन्होंने देश में जलमार्ग के विकास के लिये जो पहल की है उससे मोदी काफी खुश हैं। वैसे भी यह कयास लगाये जा रहे हैं कि मोदी सुपर कैबिनेट का कंसेप्ट ला सकते हैं। इसमें दो मंत्रालयों को जोड़कर सुपर मिनिस्ट्री बनायी जा सकती है।

ऐसे में रेल मंत्रालय की जगह सुपर ट्रांसपोर्ट मंत्रालय बनाया जा सकता है जिसमें भूतल परिवहन भी शामिल हो। कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का अब तक का सबसे बेहतरीन काम सूचना प्रसारण मंत्री के तौर पर रहा है। जिस तरीके से स्मृति मीडिया घरानों से कड़ाई से डील कर रही हैं वो मोदी को जंच रहा है। इस बार के फेरबदल में उन्हें पूर्णकालिक सूचना प्रसारण मंत्री बनाया जा सकता है। कर्नाटक से बीजेपी सासंद सुरेश अंगदी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलनी तय माना जा रहा है। इसके अलावा यूपी के पार्टी इंचार्ज ओम माथुर और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश सिंह वर्मा को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद नीतीश कुमार के करीबी राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह को कैबिनेट में जगह मिलनी तय है। साथ ही पार्टी के सांसद संतोष कुशवाहा भी राज्यमंत्री का दर्जा पा सकते हैं। बिहार से ही मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की छुट्टी हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में उन मंत्रियों के पर कतरे भी जायेंगे जिनके काम से मोदी खुश नहीं हैं। जिन मंत्रियों पर मोदी की टेढ़ी नजर है उनमें से एक हैं राजीव प्रताप रूडी जिन्हें सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट स्किल डेवलपमेंट का विभाग दिया गया था। लेकिन रूडी कई मोर्चे पर खरे नहीं उतरे जिसकी वजह से उनका जाना तय माना जा रहा है। हालांकि रूडी को इस बात की भनक लग चुकी है और वो लगातार अमित शाह के संपर्क में हैं ताकि किसी तरह से मंत्रालय बचाया जा सके। देखते हैं वह सफल हो पाते हैं या नहीं।

जाने वालों में दूसरे नंबर पर यूपी के कद्दावर कलराज मिश्र का नाम है। बताया जा रहा है कि कलराज मिश्र के काम से भी पीएम मोदी खुश नहीं हैं। वैसे भी मोदी ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनके मंत्रिमंडल में सत्तर साल से ज्यादा वालों की जगह नहीं है। बीच में यूपी के चुनाव नहीं होते तो कलराज मिश्र की विदायी नजमा हेपतुल्ला के साथ ही हो जाती। स्वास्य मंत्री जेपी नड्डा का नाम भी हटाये जाने वाले मंत्रियों में आ रहा है। जिस तरह से उन्होंने हिमाचल के एक भ्रष्ट अधिकारी को बचाने में अपनी अहम भूमिका निभाई उससे मोदी खासे नाराज हैं। हालांकि नड्डा अमित शाह के बेहद खास माने जाते हैं इसलिए उनपर अभी सस्पेंस बरकरार है।

उमा भारती भी इसी कड़ी की अगली मंत्री हैं। गंगा सफाई की जो जिम्मेदारी उनको दी गई थी उस पर ज्यादा कुछ काम नहीं हुआ है। मोदी को डर है कि विपक्ष 2019 में गंगा सफाई को मुद्दा बनाने वाला है। इसलिए उनकी जगह पर किसी और को गंगा के सफाई की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा दिल्ली से बीजेपी के मंत्री विजय गोयल की भी मोदी मंत्रिमंडल से विदायी हो सकती है। अरविंद केजरीवाल के धीरे-धीरे संतुलित होकर लाईन पर आ जाने से विजय गोयल की उपयोगिता कम हुई है।