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मैं मुसलमान हूं होली का गुलाल हूं

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मैं मुसलमान हूं
होली का गुलाल हूं
दीवाली का महताब हूं
मैं असली हिन्दुस्तान हूं
तुम हिन्दू हो ख़ास हो
ईद की मिठास हो
रमजान का इफ्तार हो

तुम भारत का प्यार हो


” होली मिलन में रंग भी और नमाज भी “

नवेद शिकोह
लखनऊ, 08 मार्च। नौसिखिया पत्रकार सिर्फ खबर देते हैं। जब यही पत्रकार बड़े और परिपक्व हो जाते हैं तब इनकी जिम्मेदारी खबर देने तक सीमित नहीं रहती। समाज को अपने सशक्त विचारों से जोड़ते हैं ये।
लखनऊ के तमाम पत्रकार मित्रों में 8-10 पत्रकारों का एक समूह मेरे खास दोस्तों में शुमार है।
ये किसी ब्रांड अखबार से नहीं जुड़े हैं।  समाज में नफरत फैलाने की सुपारी लेकर अपने बड़े खर्चे पूरे करने वाले बड़े- बड़े न्यूज चैनलों से भी नहीं हैं ये। इसलिये ये नफरत की नहीं मोहब्बत की बात करते हैं। समाज को तोड़ने की नहीं जोड़ने की कोशिश करते हैं। इनके छोटे-छोटे अखबारों की खबरों में भी ईमानदारी की महक आती है। इन पत्रकारों का आचरण और व्यवहार मरहम बनकर घायल गंगा जमुनी तहज़ीब को शिफा देता है।
पत्रकारों का ये समूह डेढ़ दशक से मुसलसल सक्रियता के साथ एक संगठन चलाता है। नाम है- जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन। इत्तेफाक से इस संगठन की कार्यकारिणी में 80%मुस्लिम पत्रकार हैं। 10-12 वर्षों से ये प्रति वर्ष बड़ा मंगल पर भव्य भंडारे का आयोजन करते हैं। रमजान में इनके रोजा इफ्तार के कार्यक्रम में मुसलमानों से कहीं अधिक हिन्दू भाई पूरी अकीदत के साथ शरीक होते हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय वर्मा जी ने आज कैसरबाग स्थिति अपने आवास पर होली मिलन का कार्यक्रम रखा था।  जिसमें मुस्लिम भाईयों की उत्साह भरी तादाद के आगे हिन्दू भाइयों की उपस्थिति बौनी पड़ गयी। ये मैं जानता था। अबीर-गुलाल के साथ होली के उत्साह के रंगों में रंगे इस मिलन में कोई अंजान ये नहीं बता सकता था कि यहां कौन हिन्दू है और कौन मुसलमान। हां तब जरूर पता चला जब नमाज के वक्त मेजबान अजय वर्मा ने होली के रंगों के बीच मुसल्ला (जानमाज़) बिछा दिया। उन्हें पता था कि साथी पत्रकार जुबैर अहमद नमाज के पाबंद हैं और नमाज का वक्त हो गया है। अजय जी ने होली मिलन के लिये गुझिया, पापड़ और तमाम स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ गुलाल-अबीर ही नहीं नमाज का भी इंतजाम किया था। क्योंकि उन्हें पता था कि उनके साथ रंग खेलने आ रहे मुसलमान मित्र नमाज के पाबंद हैं।
और ऐसे अजय वर्मा के होली मिलन में हिन्दुस्तान अजेय दिखा। जहां सौहार्द की महफिल का रंग जमता है तो फिरकापरस्ती की नफरत खिड़की के रास्ते से दुम दबाकर भाग जाती है। और अखंड भारत को तोड़ने और जोड़ने वालों की जंग के दरम्यान कोई अजय भारत की अखंडता की अजेय होने की दलील दे देता है।