गतिरोध खत्म, एक होगा उ.प्र.राज्य मुख्यालय का चुनाव
नवेद शिकोह, उ.प्र.राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति के गतिरोधों पर विराम लगाते हुए एक चुनाव संचालन कमेटी तैयार कर दी गई है। ये कमेटी 21 मार्च को विधानभवन के प्रेस रूम में करीब नौ सौ राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों का चुनाव कराएगी।
दुश्मनी जम कर करो पर इतनी गुंजाइश रहे,
जब कभी हम दोस्त बन जाएं तो शर्मिंदा ना हों…
कभी-कभी घर के बर्तन खनकते-खनकते मधुर संगीत बन जाते हैं। कुछ लोग झगड़े जैसे तेवरों में गिरेबान पकड़ते हैं और फिर लपक कर गले लग जाते हैं।
लम्बी जद्दोजेहद के बाद उ.प्र.राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति के चुनाव का विवाद समाप्त हो गया। एकता पसंद पत्रकारों की तमाम कोशिशों के बाद तल्खियां खत्म हो गई हैं।
चौबीस घंटे पहले एक कलम ने कड़वी दवा उगली थी। ये कड़वी शिफा दे गई। मैंने लिखा था बंटवारा करने वाली दो कमेटियों के चुनाव का बॉयकॉट करता हूं। ना चुनाव लड़ुगा और ना ऐसे कुरुक्षेत्र में वोट डालने आउंगा। उम्मीदवार चुनाव से पहले ही नाकारे साबित हो गए। सुलह और एकता कराने के बजाय उम्मीदवार प्रचार का नगाड़ा बजा रहे हैं।
ऐसे कड़वे शब्दों ने कड़वी दवा का काम किया। दो कमेटियों.. तमाम मतभेदों..विवादों..तकरारों और असमंजस की स्थिति में चुनाव प्रचार करने वाले सब पशेमान हुए। धीरे-धीरे सबने दो कमेटियों और दो चुनावों की स्थितियों के विरोध में बॉयकाट करना शुरू किया। ऐसे में बंटवारे के जिन्ना हार गए पत्रकार एकता की कोशिशें कामयाब हुईं।
मर्ज चुनाव कमेटी में वीरेन्द्र सक्सेना, प्रमोद गोसवामी, शिवशंकर गोस्वामी, टी.बी.सिंह, डा.एस.एस.हाशमी, शरद प्रधान, प्रांशु मिश्रा और अशोक त्रिपाठी शामिल हैं।
कुछ बदलाव भी हो सकते हैं !
पूर्व की दोनों विवादित कमेटियों में एक-एक महिला पत्रकार भी शामिल थीं, किंतु नई कमेटी में किसी एक महिला पत्रकार को भी ना शरीक कर महिला की भागीदारी शून्य रखी है। जिसपर पूर्व कमेटी की सदस्य नामला किदवई सहित तमाम महिला पत्रकारों ने सवाल उठाएं हैं।
खत्म हो सकता है सदस्यता शुल्क:
सही मायने में हर कोई राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार उ.प्र.राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति का सदस्य होता है। बावजूद इसके हर बार समिति के चुनाव से पहले सदस्यता शुल्क जमा करने की खानापूर्ति होती है। जबकि इस रकम का कोई हिसाब-किताब नहींं होता है।
इसके अलावा इस तरह सदस्यता शुल्क तमाम विवादों को जन्म देता है। इस बार भी गुटबाजों ने गुटबाजी के लिए सदस्यता शुल्क के काउंटर लगाकर टकराव को हवा दी। इसके अलावा समिति के हर चुनाव में दौलतमंद उम्मीदवार हमेशां पत्रकारों का सदस्यता शुल्क खुद जमा करके मतदाताओं को प्रभावित करता है। इन बातों के मद्देनजर पत्रकारों की मांग पर चुनाव संचालन कमेटी सदस्यता शुल्क की परम्परा समाप्त करके ये ऐलान कर सकती है कि सभी राज्य मुख्यालय संवाददाताओं की प्रेस मान्यता होने या नवीनीकरण के साथ संवाददाता स्वतः संवाददाता समिति का सदस्य है।







