लखनऊ, 21 मार्च। कोई भगवान नहीं बन सकता। भगवान के सिद्धांतों का अनुसरण कर सकता है। आचरण, व्यवहार, नैतिकता और कर्म के अक्स में भगवान दिखने लगने लगता है।
प्रेस जर्नलिस्ट आफ इंडिया के सम्मान समारोह के आयोजन समिति के जिम्मेदारों मे शामिल श्री सुशील दुबे ने डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा का शुक्रिया अदा करते हुए उनकी सादगी और मिलनसार होने की तारीफ कर दी। जिसके जवाब में डा. शर्मा ने भगवान राम और हनुमान जी के बीच संवाद का स्मरण करते हुए कहा कि भगवान राम ने हनुमान जी की प्रशंसा करना शुरु की तो हनुमान जी बेचैन हो गया। श्री राम ने बेचैनी की वजह पूछी तो हनुमान बोले- प्रशंसा अहंकार को जन्म देती है। इसलिए मैं भयभीत हूं। डिप्टी सीएम के कहने का मतलब था कि सुशील दुबे जी उनकीइतनी प्रशंसा ना करें। यहां सुशील दुबे जी श्री राम के आचरण और व्यवहार के चरित में थे तो हनुमान की तरह डिप्टी सीएम ने हनुमान के किरदार का अनुसरण करते हुए अपनी प्रशंसा ना सुनने की विनती कर ली। बात खत्म हो गयी।
पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित पत्रकारों में दिग्गज पत्रकार बृजेश शुक्ला, कमाल खान (Ndtv) पंकज झा (ABP NEWS) गोलेश स्वामी (हिन्दुस्तान) कामना हजेला(ANI) टी. एन मिश्रा (नवभारत टाइम्स) जैसे तमाम नामचीन पत्रकार चुने गये थे जो मीडिया के आसमान के सितारे कहे जाते है।
मैंने चलते वक्त दुबे जी से पूछ लिया। मैं फिलहाल किसी बड़े मीडिया हाउस मे नही हूं। पत्रकार की खबरे बड़े मीडिया प्लेटफॉर्म पर चमकती हैं तब ही वो बड़ा पत्रकार कहलाता है। मैं तो गुमनामी के अंधेरे में हूं।
सुशील जी बोले- रोशनी में रौशन प्रतिभाओं के साथ अंधेरों पर निगाहें रखना भी हमारी फितरत है। अंधेरों मे जुगनुओं की रोशनी की हम ज्यादा कद्र करते हैं।
मीडिया की मुट्ठी में दम होता है। यहां ये नहीं देखा जाता कि कौन सी उंगली बड़ी है और कौन सी छोटी।
मुझे भगवान श्री राम और उनके अवतार श्री कृष्ण का आचरण और व्यवहार याद आ गया। उनके सिद्धांतों वाला बराबरी का अधिकार याद आ गया। मानव जाति को छोटे-बड़े में फर्क ना करने वाले राम- कृष्ण का आचरण याद आ गया। सुदामा की अहमियत और शबरी के बेर का किस्सा मेरे जहन में गूंजने लगा।
सुशील दुबे जी के आचरण और व्यवहार में इस बार मुझे श्री राम के किरदार का अक्स नजर आ रहा था।







