चुनाव में बड़े कद की भी लग जाती है: छोटी कीमत

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  • अध्यक्ष पद पर हेमंत तिवारी की जीत
  • 28 साल की पत्रकारिता वाले दीन को संवाददाता समिति के चुनाव में मिले 18 वोट
  • संवाददाता समिति के पिछले चुनाव में 235 वोटों से जीतने वाला मैं इस चुनाव में क्यों हारा!
 -नवेद शिकोह
लखनऊ, 17 अप्रैल। सियासत तो सियासत ही होती है। राजनीति का मक़सद राज करने की नीति के इरादों से ही जुड़ा हो तो भौतिकता के आगे नैतिकता को झुकना ही पड़ता है। चुनाव सियासत का गर्भ होता है और चुनावी विजय उसकी औलाद।
लोकसभा, विधानसभा, पार्षद या पंचायत का चुनाव हो, मजदूर संघ, टैम्पो चालक संघ का या बुद्धिजीवी वर्ग के पत्रकारों की समिति का इलेक्शन हो। लोकतंत्र की पाकीजा सेज पर सियासत सामाजिक मूल्यों का बलात्कार करने की हरकत कर ही देती है।
चारा घोटाले का राज फाश करने वाली खबरों के स्तर जैसी रक्षा से जुड़े मामलों की खोजी खबरों के जरिए पत्रकारिता को अपना विशेष योगदान देने वाले प्रभात रंजनदीन को कौन नहीं जानता! लगभग तीन दशक से निरन्तर पत्रकारिता में सक्रिय प्रभात रंजनदीन भी उ. प्र. राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव में अध्यक्ष पद का चुनाव बुरी तरह हार गये।
मैं ये नहीं कहता कि चुनाव जीतने वाले अच्छे लोग नहीं होते। लेकिन ये तो मानना पड़ेगा कि चुनाव जीतने का कौशल हर किसी के पास नहीं होता। चुनाव की थाली में जाति-धर्म का अचार, भावनात्मक सलाद, झूठी और मीठी बातों के मसालों वाली चुनावी कैम्पेन का बेहतरीन मैनेजमेंट होना जरूरी है। ये हुनर हर किसी के पास नहीं होता।
पत्रकारों को भी सिर्फ लिखने-पढ़ने वाला ही नेता नहीं चाहिए होता है। पत्रकारों के बीच ज्यादा वक्त गुजारने वाला एक्स्ट्रा आडनरी पत्रकार ही पत्रकारों की पसंद होता है। जिसकी सरकारों में पहचान हो, जिसमें किसी भी अधिकारी /नेता पर दबाव बनाकर काम कराने की काबिलियत हो। एक लाइजनर के गुण हों। पत्रकारों के लिए कुछ ना करने पर गालियां खाने का संयम और धैर्य हो। ऐसे को ही पत्रकार अपना नेता स्वीकार करते हैं।
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उ. प्र.राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव का इतिहास रहा है कि इस चुनाव में बड़े-बड़े नामचीन पत्रकार ओंहदे मुंह गिरे हैं।
क्योंकि सियासत की गणित और कैमिस्ट्री को लेकर चलना हर किसी के बस में नहीं।
जहरीले कैमिकल का प्रयोग करके ही जहर को मारने का रसायन तैयार होता है। सियासी गणित में दो और दो चार भी होता है और दो और दो बाइस भी।
राजनीतिक दलों के चुनाव की तरह लुभाना, भड़काना, दारू पिलाना, खूब प्रचार करना और बेहतरीन चुनावी प्रबंधन के साथ धर्म-जाति का समीकरण भी पत्रकारों के चुनाव में सबसे बड़ा हथियार होता है।
चुनाव लड़ने का मेरा खुद का अनुभव है। प्रत्याशी की जाति-धर्म के 50% वोटर उसे आँख बंद करके वोट दे देते हैं। 20% वोट प्रचार/कैम्पेन प्रबंधन पर निर्भर रहता है। जबकि 30% वोट आपकी पर्सनालिटी /बैक ग्राउंड /शोहरत/योगदान… इत्यादि के हिस्से से आता है।
यदि लड़ाई में आपकी जाति-धर्म का प्रतिद्वंद्वी आपके मुकाबले नहीं है और आपने अपनी जाति-धर्म के हवाले से वोट मांगा है तो आपकी जाति के करीब 50% वोटर आपको आंख बंद करके वोट दे देंगे। नहीं तो आपकी जाति-धर्म का प्रतिद्वंद्वी इन वोटों को धर्म-जाति के नाम पर हासिल कर लेगा।
उ. प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव में उपाध्यक्ष पद की दावेदारी में मेरी हार की वजह भी कुछ ऐसी ही थी।
प्रत्येक चुनावी विश्लेषकों का मानना था कि उपाध्यक्ष पद के मुकाबले में 14 प्रतिद्वंद्वियों में मैं अपने काम/बैक ग्राउंड और पहचान की वजह से एक तरफा चुनाव जीत जाऊंगा।
 लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब मैंने अपनी हार की समीक्षा की तो पता चला कि मेरे धर्म के एक प्रतिद्वंद्वी जिनकी हैसियत 20 वोट हासिल करने की थी उन्होंने धर्म का पत्ता खेलकर मुझे जीतने नहीं दिया और वो खुद 80 वोट हासिल करके खुद भी हारे।
उन्होंने मुझे हराने के लिए चुनाव से कुछ दिन पहले 125 मुस्लिम पत्रकारों /वोटरों के बीच एक झूठी कहानी प्रचारित करना शुरु कर दी। मुस्लिम पत्रकारों /वोटरों से कहा कि मुझे (नवेद शिकोह) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित अध्यक्ष पद प्रत्याशी चुनाव लड़वा रहे हैं। अध्यक्ष प्रत्याशी चाहते हैं कि उपाध्यक्ष पद के दूसरे मुस्लिम प्रत्याशी के वोट कट जायें और वो चुनाव हार जाये। जिसके लिए नवेद शिकोह वोट कटवा के तौर पर आर एस एस/भाजपा की तरफ से खड़े किये गये हैं।
इस झूठे प्रचार का जबरदस्त असर चुनाव में दिखा। करीब 100 मुस्लिम पत्रकारों /वोटरों ने मताधिकार किया और मेरे हिस्से के धर्म पर आधारित सौ वोटों में अस्सी वोट छिटक कर साजिशकर्ता मुस्लिम प्रत्याशी के हिस्से में आ गये। इसके बावजूद वो खुद भी हार गया और उसने मुझे भी हरा दिया। इसी गंदी तिकड़मों की समझ रखने वाला ही इस तिकड़म का बचाव कर सकता था।
मैं इसमें अनभिज्ञ था।
….. और मैं चुनाव हार गया।
चुनाव विशेषज्ञों की भविष्यवाणी धरी की धरी रह गयी।

हेमंत तिवारी जीत की ख़ुशी पर बोलें:

उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकार साथियों ने लगातार तीसरी बार जिस तरह मुझपर भरोसा जताया है , अभिभूत हूं और हृदय से आभारी भी । उम्मीदों से बेहतर की कोशिश रहेगी । लगातार रिकॉर्ड वोट देने के लिए बहुत शुक्रिया।

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