गरीब पत्रकारों को मकान देगी योगी सरकार!

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नवेद शिकोह

हर दौर की सरकारों ने हमेंशा भरे को भरा है। यानी ब्रांड मीडिया घरानों में मोटी तनख्वाह पाने वाले पत्रकारों को सरकारी लाभ दिए है। पत्रकारों की मदद के लिए हर योजन का लाभ बड़े-बड़े अखबारों-चैनलों के सम्पन्न पत्रकारों को मिला। या फिर पत्रकारिता का मुखौटा लगाये लग्जरी गाड़ियों और ब्रांडेड सूट-बूट वाले भौकाली दलाल उन पत्रकारों का हक मारते रहे हैं जो गरीब-जरुरतमंद, ईमानदार और वास्तविक पत्रकार हैं।

लेकिन योगी राज में अब ये नहीं होगा। सरकारी मकान से लेकर पत्रकारों को मिलने वाले हर लाभ पर पहला हक़ जरूरतमंद और गरीब पत्रकार का होगा। इस नेक काम पर अमल करने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नयी नियमावली तैयार कर रही है।

मुख्यमंत्री कैम्प के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सरकार गरीब पत्रकारों के हितों के लिए नियमों में परिवर्तन कर रही है। करोड़ों की सम्पत्ति और मोटी तनख्वाह पाने वाले पत्रकारों को मिल रही सरकारी सुविधाओं पर ब्रेक लग जायेगा।

मौजूदा वर्ष 2018 में राज सम्पति विभाग में सभी पत्रकारों के मकानों के आवंटन का नवीनीकरण लंबित है। अब नवीनीकरण से लेकर नया आवंटन भी दिल्ली की तर्ज पर होगा।


नयी नियमावली दिल्ली की तर्ज पर लागू होगी

लखनऊ में पत्रकारों को मकान आवंटित करने की नयी नियमावली दिल्ली की तर्ज पर लागू होगी। जिसके तहत रियायती किराये पर सरकारी मकानों का लाभ कम वेतन पाने वालों को ही मिल सकेगा। प्रिंट मीडिया के जिन पत्रकारों का मासिक वेतन 1500 हजार से कम है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जिन पत्रकारों को बीस हजार रूपये से कम वेतन मिलता है उन्हें ही सरकारी मकानों का लाभ मिल सकेगा। अन्य पुराने निममों में राज्य मुख्यालय की मान्यता और निजी मकान ना होने की शर्त जारी रहेगी। इन शर्तों को पूरा करने वालों को पांच वर्ष के लिये आवास आवंटित होगा। और यदि आपकी प्रेस मान्यता समाप्त हो जाती है या आपका वेतन 15/20हजार से बढ़ जाता है अथवा आप अपना निजि मकान खरीद लेते हैं तो तत्काल आपके सरकारी मकान का आवंटन स्वतः रद्द हो जायेगा।

नयी नियमों के अंतर्गत सरकारी मकानों पर काबिज निजी मकानों के मालिक और 15/20 हजार प्रतिमाह वेतन से अधिक वेतन पाने वालों के सरकारी मकानों का नवीनीकरण ना किये जाने पल पर विचार किया जा रहा।

कम वेतन वालों को ही सरकारी मकानों का लाभ दिये जाने की नियत से ही प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने पत्रकारों की प्रेस मान्यता का नवीनीकरण करने के लिए वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) का जमा करना अनिवार्य कर दिया था।

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