नवेद शिकोह
असली पत्रकार की किसी सरकार में कद्र नहीं हुई। कभी प्रवक्ता टाइप के सत्ता के चाटुकार को तो कभी लाइजनर को, तो कभी इधर से उधर खूठी-सच्ची मुखबरी करने वाले को, तो कभी ट्रांसफर-पोस्टिंग, ठेके-पट्टे की दलाली करने वाले को, तो कभी विज्ञापन हासिल करने का हुनर जानने वाले विज्ञापन प्रतिनिधियों के चेहरे पर बड़े पत्रकार का मुखौटा लगा दिया जाता है।
क्या आपको जानते हैं कि ग़ैर पत्रकारों के चेहरे पर पत्रकार का मुखौटा चढ़ाने वाले कौन लोग होते हैं!
सरकारें, नौकरशाह, राजनेता। इसके अलावा एक और ताकत है जो पत्रकारिता की छवि को बर्बाद करने में अपना अहम किरदार निभा रही हैं। अपनी व्यवसायिक दुकानों की प्रगति के लिए मीडिया का सहारा लेने वाली शक्तियां। ये अपनी बेइमानी की दुकानें चलाने के लिए मीडिया की दुकानें खोल लेते हैं, ताकि धनपशुओं और सरकारों को ब्लेकमेल करने या इनकी चाटूकारिता करने के लिए पत्रकारिता का गलत इस्तेमाल किया जाये।







