- हज से पहले हज हो गयी
लखनऊ, 15 जुलाई 2018: सउदी अरब के काबे में ही हज नहीं होती। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में भी हज होती है। श्री रामचंद्र, नानक, बुद्ध, गांधी.. की इस धरती पर आज हज होती देखी। आपसी मोहब्बत, सौहार्द, अखंडता, धर्म निरपेक्षता, सामाजिक समरसता और हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की बेमिसाल हज देखने को मिली। मजहबी नफरतों से दूषित माहौल में पवित्र एकता से भरे शुद्ध वातावरण की हज का मंज़र देखा।
दुनिया भर में जहां मुसलमानों की मसलकी नफरत में मुसलमान, मुसलमान के खून का प्यासा है वहीं हिन्दुस्तान की सरजमीं में हज के प्रति हिन्दुओ के सम्मान की भावना किसी हज से कम नहीं थी।
सियासी चालों से भारत में हिन्दू – मुसलमानों के बीच नफरत फैलाने की साजिशों में बदनाम पत्रकारिता की विपरीत स्थितियों में लखनऊ के पत्रकारों को अपना कर्तव्य निभाने की हज करते देखा।
ये मौका था लखनऊ के बटलर पैलेस स्थित वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी के आवास का। यहां मैंने हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी ताकत समझी जाने वाली साम्प्रदायिक एकता के काबे का तवाफ(परिक्रमा) करते लोगों को देखा।
पत्रकार साथी मोहम्मद कामरान कल हज करने के लिए सऊदी अरब जा रहे हैं। इनके इस पवित्र अनुष्ठान के सम्मान.. एहतराम के लिये शहर के गैर मुस्लिम पत्रकार और विशिष्ट हस्तियों का सैलाब बटलर पैलेस में इकट्ठा था। फूल-मालाओं और तमाम अंग वस्त्रों से मोहम्मद कामरान के गले में जब पत्रकार हेमंत तिवारी और स्वामी सारंग ने राम नामी वस्त्र डाला तो कामरान भावुक हो गये। बोले- मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्रजी के इस देश को राम जी के सिद्धांतों, मूल्यों और उपदेशों ने ही ऐसे संस्कार दिये हैं कि एक मामूली मुसलमान की हज यात्रा के सम्मान में हजारों बुद्धिजीवी हिन्दू भाई खड़े हैं। दूसरे के धर्म के सम्मान से खुद के मजहब का मान बढ़ता है।
-नवेद शिकोह







