सीएसआईआर-सीडीआरआई की प्रधान वैज्ञानिक डाक्टर रितु को मिला प्लेटिनम जुबली अवार्ड

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डाक्टर रितु ने शीशम से बनाई ऐसी उत्पाद कि आपकी टूटी हडि्डयां अब जुड़ जाएंगी 15 दिन में, डाक्टर रितु के सौ से अधिक शोधपत्र हो चुके हैं प्रकाशित, 23 अन्य उत्पादों के भी करा चुकी हैं पेटेंट

लखनऊ, 17 दिसम्बर 2020: सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ की प्रधान वैज्ञानिक डॉ रितु त्रिवेदी ने शीशम से ऐसी दवा बनाई है, जिससे आपकी अस्थियां अब डेढ़ माह में नहीं 15 दिन में ही जुड़ जाएंगी। यही नहीं पालक से भी एक दवा बनाई है, जो आस्टियो आथराइटिस में कारगर है। इसके लिए उन्हें बायोलाजिकल साइन्सेज में वर्ष 2020 के प्रतिष्ठित नासी-रिलाएंस इंडस्ट्रीज प्लेटिनम जुबली अवार्ड से सम्मानित किया गया है। पुरस्कार स्वरूप एक प्रशस्ति पट्टिका एवं 3.0 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है।

डॉ रितु त्रिवेदी का वैज्ञानिक योगदान मुख्यतः मेटाबोलिक अस्थि विकार के क्षेत्र में रहा है जिसमें रजोनिवृत्ति उपरांत (मेनोपाज़ के बाद) ऑस्टियोपोरोसिस एवं ऑस्टियोआर्थराइटिस विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनका शोध कार्य, प्राकृतिक उत्पाद आधारित छोटे अणुओं के रूप में अस्थि स्वास्थ्य में सुधार हेतु प्रभावी उत्पाद के रूप में परिणित हुआ है। उन्होंने अनुसंधान के माध्यम से शीशम (डल्बर्जिया सिस्सू) का नवीन अस्थिजनक (ओस्टियोजेनिक) मार्कर के साथ उसकी ओस्टोजेनिक प्रभावकारिता का सफल प्रदर्शन किया जो बाजार में रीयूनियन के ब्रांड नाम से रैपिड फ्रैक्चर हीलिंग एजेंट के रूप में उपलब्ध है। अब तक प्लास्टर चढ़ाने के बाद हड्डियां लगभग डेढ माह में जुटती हैं। इससे मरीज को लंबे समय तक बैठकर उसके जुड़ने का इंतजार करना होता है। डाक्टर रितु द्वारा बनाये गये यह उत्पाद लेने पर हड्डियां 15 दिन में ही जुड़ जाती हैं। इसका रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में एक वर्षीय नैदानिक ​​परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) भी किया जा चुका है।

डॉ ऋतु का देसी पालक (स्पीनेशिया ओलेरेसी) पर किया अनुसंधान से तैयार उत्पाद, पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के प्रबंधन के लिए जाइंट फ्रेश के नाम बाजार में उपलब्ध है जो उपास्थि के क्षय को रोक कर नवीन उपास्थि कोशिकाओं के निर्माण की भी क्षमता रखता है।

इन प्रमुख योगदानों के अतिरिक्त आपको 23 अन्य पेटेंटों सहित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित करने का श्रेय भी प्राप्त है। आप नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (इंडिया) की फेलो भी है एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा प्रतिष्ठित टाटा इन्नोवेशन फेलौशिप 2019-20 से भी सम्मानित हो चुकी हैं।

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