लखनऊ : मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर 17 अगस्त 2025 की रात एक ऐसी घटना ने देश को झकझोर दिया, जिसमें देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात एक सैनिक को टोल कर्मियों की बर्बरता का शिकार होना पड़ा। भारतीय सेना के जवान कपिल कवाड़, जो कश्मीर में अपनी ड्यूटी जॉइन करने के लिए उत्साह से दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, को महज टोल प्लाजा पर जाम और टोल फीस को लेकर सवाल उठाने की कीमत अपनी जान पर बन आई। इस घटना ने न केवल सैनिकों के सम्मान पर सवाल खड़े किए, बल्कि टोल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और स्थानीय समुदाय के गुस्से को भी उजागर किया।
घटना का दूसरा पहलू: टोल नीतियों और स्थानीय असंतोष का टकराव
बता दें कि भूनी टोल प्लाजा पर हुए इस विवाद की जड़ में टोल कर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव भी है। जानकारी के अनुसार, कपिल कवाड़ और उनके चचेरे भाई शिवम ने टोल प्लाजा पर लंबे जाम और स्थानीय लोगों के लिए टोल छूट की मांग को लेकर टोल कर्मियों से बहस की। इस बहस ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया, टोल कर्मियों ने कथित तौर पर कपिल को खंभे से बांधकर लाठी-डंडों और पत्थरों से पीटा।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। 18 अगस्त को सैकड़ों ग्रामीणों ने टोल प्लाजा पर धावा बोलकर तोड़फोड़ की और टोल बूथों को नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों का आरोप है कि टोल प्लाजा, जो उनके गांव के ठीक बगल में है, स्थानीय लोगों से अनुचित टोल वसूलता है, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें छूट मिलनी चाहिए। इस घटना ने टोल प्रबंधन की नीतियों और उनके संचालन में पारदर्शिता की कमी को उजागर किया है।

पुलिस ने की कानूनी कार्रवाई, 6 गिरफ्तार
मेरठ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर छह आरोपियों जिसमे सुरेश, सचिन, अंकित, विजय, अनुज, और एक अन्य को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ हत्या के प्रयास (आईपीसी धारा 307) सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। कपिल और शिवम को प्राथमिक उपचार के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर है। मेरठ के एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, और अन्य संदिग्धों की तलाश के लिए पुलिस टीमें सक्रिय हैं।
ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर टोल प्लाजा के नियमों में बदलाव की मांग की
यह घटना केवल एक सैनिक की पिटाई तक सीमित नहीं है; यह टोल प्लाजा संचालन में स्थानीय समुदायों के प्रति असंवेदनशीलता और सैनिकों के प्रति सम्मान की कमी को भी दर्शाती है। ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर टोल प्लाजा के नियमों में बदलाव और सैनिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की मांग की है। यह घटना टोल नीतियों की समीक्षा और सैनिकों के लिए विशेष प्रावधानों की आवश्यकता पर जोर देती है।
उठ रहे हैं सवाल
भूनी टोल प्लाजा की इस घटना ने न केवल मेरठ बल्कि पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या टोल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन इस मामले से सबक लेंगे? क्या सैनिकों के सम्मान और स्थानीय लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? फिलहाल, पुलिस जांच और ग्रामीणों का आक्रोश इस मामले को और गंभीर बनाए हुए है।







