अब इसे युवाओं के करिअर से खिलवाड़ नहीं तो और क्या कहेंगे। पहले नीट यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोप लगे जिसके कारण विभिन्न शहरों में आक्रोशित युवाओं ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया। उसके बाद यूजीसी नेट परीक्षा में कई स्तरों पर गड़बड़ी के संकेत मिलने के कारण उसे रद्द करने की घोषणा की गई। परीक्षाओं का आयोजन करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए काफी दिनों तक नीट के मामले में किसी गड़बड़ी से इंकार करती रही। यहां तक कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी एनटीए को क्लीन चिट दे दी थी लेकिन इस मामले में जब कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई तब गड़बड़ी की बात को स्वीकार किया।
नीट और यूजीसी नेट परीक्षा की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। करीब एक हफ्ते तक चले घटनाक्रमों के बाद एनटीए डीजी को हटा दिया है और मामलों की संवेदनशीलता को कम करने के लिए परीक्षाओं को पारदर्शी, सुचारु और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

सरकार का कदम इस बात का सूचक है कि जिन गिनी-चुनी परीक्षाओं को सबसे सटीक व्यवस्थाओं के बीच कराए जाने और उनकी गुणवत्ता के लिए जाना जाता रहा है, उनमें धांधली या पेपर्स लीक हो जाने की घटनाओं के बीच उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने की बात को अप्रत्यक्ष रूप से सरकार ने मान लिया है और अब जताना चाहती है। कि वह इस मामले में काफी गंभीर है। जबकि नीट-यूजी का रिजल्ट आने के बाद से ही कोई ठोस कदम उठाने के बजाय एनटीए का रवैया गुमराह करने वाला रहा जिसके असर में आकर सरकार भी इस प्रकरण को गंभीरता से न लेकर महज टालू बयानबाजी करती रही।
अब जब नई संसद के पहले सत्र में ही इस मामले को विपक्ष द्वारा उठाए जाने के आसार तय नजर आ रहे हैं, तब शिक्षा मंत्रालय ने अपना चेहरा बचाने की कोशिश के तौर पर यह कदम उठाया है। अब देखने की बात यह है कि दो महीने के बाद नई समिति क्या-क्या सुझाव देती है और उन पर कितनी गंभीरता के साथ अमल किया जाता है। फिलहाल इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों का भविष्य तो अधर में ही है।







