बाराबंकी, 21 मार्च, 2021: शहर के जैदपुर रोड स्थित आवासीय क्षेत्र शिव विहार कालोनी में नियम के विरुद्ध मोबाइल टावर लगाया जा रहा है जिसे स्थानीय लोगों ने घोर आपत्ति की है। कालोनी निवासी राम प्रगट कनौजिया के मकान से सटा हुआ व संतोष पाठक रत्नेश कुमार के दरवाजे पर ठीक सामने टावर लगाया जा रहा है जिसे रोकने के लिए कनौजिया ने 112 पर फोन कर पुलिस बुलाई लेकिन पुलिस भी असहाय होकर तब लौट गई जब नियमों को दर किनार कर नगर पालिका ने टावर लगाने का शुल्क जमा कराने की अनुमति दे दी। अब स्थानीय लोग जिलाधिकारी से टावर लगाने से रोकने के लिए प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई है।
नगर में सरकारी एवं निजी मोबाइल कंपनियों के टॉवर लगाने में टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तय गाइड लाइन का पालन नहीं किया गया। सभी मोबाइल टॉवर नियम विरुद्ध आवासीय क्षेत्रों में लगाए गए हैं। मोबाइल टॉवर के आसपास रहने वाले लोग मोबाइल टावर से निकलने वाले माईक्रोबेव रेडिएशन का खतरा झेल रहे हैं। दिनों दिन रेडिएशन का खतरा बढ़ता जा रहा है।

मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बढऩे अर्थात् 2-जी मोबाइल नेटवर्क से 4-जी मोबाइल नेटवर्क सेवा शुरू होने से नगर में रेडिएशन का खतरा दोगुना हो जाएगा। जहां 2-जी नेटवर्क मोबाइल टावर में 1900 मेगाहर्ट्जस की तरंगें प्रसारित करने में 20 वाट की ऊर्जा की आवश्यकता होती है, वहीं 4-जी मोबाइल नेटवर्क में समान तरंगों को प्रसारित करने में दोगुनी अर्थात् 40 वाट ऊर्जा की आवश्यकता होगी। मोबाइल टावर से प्रसारण के लिए ऊर्जा बढऩे के साथ ही रेडिएशन भी बढ़ जाता है। मोबाइल कंपनियां लागत बचाने की फेर में टावर की संख्या बढ़ाने के स्थान पर पहले से लगे मोबाइल टावर की प्रसारण क्षमता बढ़ा देते हैं, जिससे रेडिएशन का खतरा और भी बढ़ जाता है।
क्या है टॉवर लगाने की गाइड लाइन:
मोबाइल टावर लगाने की वर्तमान गाइड लाइन के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में टावर लगाना पूर्णत: प्रतिबंधित है। पुरानी गाइड लाइन के अनुसार भी आवासीय क्षेत्रों में मोबाइल टावर तभी लगाया जा सकता था, तब की कोई अन्य विकल्प न हो। आवासीय क्षेत्रों में जहां मोबाइल टावर लगाना है, उसके आसपास रहने वाले आवासीय भवन मालिकों से मोबाइल टावर लगाने की सहमति आवश्यक है। भवन मालिक की सहमति से आवासीय भवन से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर ही मोबाइल टावर लगाया जा सकता था। नगर में सभी टावर नियम विरुद्ध आवासीय क्षेत्रों में लगे हुए हैं। इनके लगाने में न ही भवन मालिकों से सहमति ली गई, न ही 100 मीटर की दूरी के नियम का पालन किया गया।
राशि जमा करवा कर सौंप दी अनुमति:
नगर पालिका द्वारा मोबाइल टॉवर की अनुमति देने में केवल मोबाइल कंपनियों से तय राशि जमा कराने पर ही ध्यान दिया गया है। अनुमति देते समय निर्धारित गाइड लाइन को नजर अंदाज कर दिया गया है। नियम विरुद्ध नगर पालिका द्वारा मोबाइल कम्पनियों को टॉवर लगाने की अनुमति का दुष्परिणाम टॉवर के आसपास रहने वाले लोग भुगतेंगे।
जिला प्रबंधक दूर संचार दिनेश कुमार सिंह ने इस बाबत बताया कि मोबाइल टावर आवासीय परिसर में लगाना नियम विरुद्ध है। इस टावर को लगाने के लिए नियमो का पालन नही किया गया है।







