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    मेरा देश आजाद हो गया है, अब मैं हिन्दी में ही बोलूँगा: महात्मा गांधी

    ShagunBy ShagunOctober 1, 2020 Current Issues No Comments4 Mins Read
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    ज़रा याद करों कुर्बानी: गाँधी जयंती 2 अक्टूबर पर खास :

    हम सभी भारतवासी अपने बचपन से ही महात्मा गांधी के विषय मे जानते व पढते सुनते चले आ आ रहे हैं पर फिर भी गाँधी जी से जुड़ी हुई अनेको ऐसे जानकारियां जो रोचक तथ्य से भरपूर हैं जिन्हें हम लोग शायद ही जानते हों। वैसे गाँधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1859 को पोरबंदर शहर में हुआ था इस बात को लगभग हम सभी लोग जानते हैं, लेकिन उनके जन्म के दिन शुक्रवार का दिन था यह बात शायद ही सभी लोगों को पता हो एक और बात जो यह है कि हमारे देश को शुक्रवार के दिन ही स्वतंत्रता भी प्राप्त हुई थी और इसे संयोग ही कहा जायेगा कि जिस दिन गांधी जी की हत्या हुई थी वह दिन भी शुक्रवार का ही दिन था।

    महात्मा गाँधी की जीवनी 170 से भी अधिक भारतीय भाषाओं में लिखी जा चुकी है जोकि शायद ही किसी अन्य भारतीय महा पुरुष की जीवनी इतनी भारतीय भाषाओं में आज तक लिखी गयी हो।

    महात्मा गाँधी सदैव दूसरों की मदद करने के लिये तत्पर रहा करते थे। किसी की भी मदद करने के लिये शारीरिक रूप से न कर बौधिक एवं अन्य तरीकों से भी किया जा सकता है। एक दफ़े वे ट्रेन से सफर कर रहे थे। ट्रेन जैसे ही चली कि जल्दी से ट्रेन में चढ़ते वख्त उनका एक पैर का जूता पैर से निकल कर नीचे पटरी पर जा गिरी, उन्होंने फ़ौरन ही अपना दूसरा जूता निकाल कर उसी के पास फेंक दिया उसे फेकने में उनकी यह सोच थी कि जिसे भी यह जूता मिले उस जूते का जोड़ा ही मिले जो उसके पहनने के काम में आ सके।

    गाँधी जी एक महान लेखक भी थे, उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन काल मे 50,000 से भी अधिक पृष्ठों का लेखन कार्य किया था। वैसे गाँधी जी समय के बहुत पाबंद हुआ करते थे और उनकी यह ख़ास पहचान यह हुआ करता था कि वे हमेशा एक घड़ी अपनी धोती के गिरहवान में लगा कर चलते थे।

    सत्याग्रह के अनुभवों को साथ लेकर जब गांधी जी वर्ष 1915 में भारत वापस आए और देखते ही देखते वे भारत के राजनीतिक पटल पर छा गये।

    वर्ष 1930 में टाइम मैगजीन ने उन्हें “Man of the year” चुना था। देश को आज़ादी मिलने के बाद जब कुछ पत्रकारों ने उनसे अंग्रेजी भाषा मे प्रश्न पूछा तो उन्होंने दोटूक शब्दों में यह कहा कि “मेरा देश अब आजाद हो गया है, अब मैं हिन्दी भाषा में ही बोलूँगा। राष्ट्र भाषा के विषय में उनका विचार बहुत ही स्पष्ट था कि कोई भी देश तब तक उन्नति नही कर सकता जब तक कि वह अपनी भाषा में नही बोलेगा।

    वायसराय इरविन और गांधी जी के बीच 5 मार्च, 1931 एक समझौता हुआ था जिस समझौते के अनुसार अहिंसक तरीके से आंदोलन करने के दौरान गिरिफ्तार किये गए सभी कैदियों को छोड़ने की बात तय हुई। लेकिन, राजकीय हत्या के मामले में फांसी की सज़ा पाने वाले भगत सिंह को माफ़ी नहीं मिली। भगत सिंह के अलावा तमामों दूसरे कैदियों को भी ऐसे मामलों में माफी नहीं मिल सकी। जिसकी वजह से यही से गांधी जी के प्रति लोगों के विरोध करने की शुरुआत हुई थी।

    मौजूदा समय मे हम लोग गांधी जी का इतना विरोध क्यों करते हैं। भारत में गांधीजी का जितना विरोध होता है उतना शायद ही किसी अन्य मुल्क में नहीं होता है। यहां तक कि जितना सम्मान विदेशों में उन्हें मिला उतना सम्मान भारत में आज तक उन्हें नहीं मिला पाया इसका अर्थ यह कतई नही है कि वे सम्मान के हकदार ही नहीं थे बल्कि यह हमारी संकुचित सोच को ही प्रदर्शित करता है। -प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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