जंगल के संस्मरण : अनुराग प्रकाश
जंगल के किनारे सरसो और गेहूं के खेत बहुत खूबसूरत लगते है लेकिन इन फसलों को बचाने के लिए चौकीदार सर्दियों की पूरी पूरी रात जागकर फसलो को बचाने में गुज़ारते है।
ऐसे ही मुझे मेरे एक मित्र की कहानी याद आ गई । उसका खेत जंगल के बिल्कुल सटा हुआ था। सर्दी की एक रात करीब 9 बजे मैं उससे मिलने उसकी झोपड़ी की तरफ चल दिया। खेत से काफी पहले ही अपनी कार खड़ी कर पैदल जाना पड़ता था उसके पास।
मेरी गाड़ी की आवाज़ सुनते ही रमेश तुरंत झोपड़ी से बाहर आ गया और अपनी टोर्च जलाकर जोर से आवाज़ लगाने लगा
चले आओ साहब।
कार से निकल कर उसकी झोपड़ी तक जाने में हाथ ठंड की वजह से सुन्न हो गए थे ।कड़ाके की ठंड हो रही थी।
झोपड़ी के बाहर ही उसने आग दहका रखी थी। जाते ही हम लोग आग के एकदम पास बैठे तब जाकर जान में जान आई।
फिर मैंने अपने जैकेट से निकाल कर उसका गिफ्ट उसे दिया जिसे देखकर खुशी से उसकी आंखे भर आई वो एवरेडी की एक नए टोर्च थी ऐसी भयानक सर्द रात में टोर्च उनकी लिए बहुत बहुमूल्य चीज़ होती है।

कुछ देर बात करने के बाद वो मेरे लिए चाय बनाने लगा और चाय पीते पीते हम लोग आपस मे बातचीत करने लगे । मैने उससे पूछा ।
क्या तुम्हारी झोपड़ी के पास कभी बाघ आया है ???
और क्या तुमने बाघ कभी बहुत करीब से देखा है ?
कुछ सेकंड याद करने के बाद उसने अपना एक वाक्या मुझे बताना शुरू किया।
उसने कहा करीब 2 साल पहले वो इसे खेत में गेहू की फसल बचा रहा था । दिसम्बर का महीना था और कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। कोहरा इतना कि बिल्कुल थोड़ी दूर की ही चीज़ दिखाई दे रही थी। रमेश ने बताया कि उस दिन वो दूसरे गांव में एक शादी से लौटने के कारण काफी थका महसूस कर रहा था।
खेत पर जाने की उसकी हिम्मत नही हो रही थी। लेकिन जाना तो था ही। अंधेरा होते ही वो अपने खेत पर पहुच चुका था । रात 10 बजे के आसपास थकान की वजह से उसकी आंख लग गई। कुछ देर बाद खेत मे कुछ आवाज़ से उसकी आंख खुली और वो बाहर आया और टोर्च जलाई तो देखा चीतलों का झुंड उसके खेत को चर रहा था। उसने जोर से आवाजे लगा कर उन्हें अपने खेत से बाहर निकाला और तब तक अगल बगल से और भी चौकीदारों की आवाजें आने लगी और रमेश फिर झोपड़ी में वापस आकर बैठ गया।

थकान की वजह से उसकी आंखें अपने आप बन्द हो रही थी और न चाहते हुए भी वो फिर सो गया । कुछ देर बाद फिर कुछ चीतल खेत मे आ गए जिसकी वजह से फिर रमेश को बाहर आकर उन्हें भागना पड़ा इसी प्रक्रिया में करीब 3 बज गया था और अब रमेश के लिए जागना बहुत मुश्किल हो गया था और वो रजाई ओढ़ कर सो गया । काफी देर तक सब शांत रहा करीब चार बजे फिर खेत मे कुछ हलचल होने से रमेश की आंख खुल गई और वो टोर्च लेकर बाहर निकला और चीतलों को भगाने के लिए चल पड़ा।
नीद की वजह से उसकी आंखें नही खुल रही थी और वो आंखों को मलता हुआ जैसे ही खेत के किनारे उस गजह आया जहा से आवाज़ आ रही थी और उसने जैसे ही टोर्च को घुमाया तो देखा एक बाघ उससे मात्र 10 फुट की दूरी पर ही खड़ा था और टोर्च की रोशनी सीधे उसके मुंह पर पड़ी थी।
बाघ को देखते ही उसकी नींद एकदम गायब हो गई । बाघ सीधे उसकी तरफ ही देख रहा था कुछ सेकंड तक तो वो बिल्कुल जड़ हो गया उसने बताया बाघ के मुँह से सर्दियों में निकलने वाली भाप को भी वो देख सकता था।
बाघ उसके इतने करीब था की एक जम्प में उसका काम तमाम कर सकता था लेकिन कुछ समय तक जड़ अवस्था मे रहने के बाद रमेश ने टोर्च की रोशनी नीचे अपने पैरों की तरफ की और धीरे धीरे वापस उल्टा चलते हुए पीछे की तरफ होने लगा। बाघ भी ये सब बड़े कौतूहल से देखता रहा फिर उसने जोर से सर को झटका और वापस मुड़ कर कोहरे की चादर में गुम हो गया।
रमेश भाग कर वापस आग के पास आया तब जाकर उसकी जान में जान आई। फिर उसने जोर से अपने अगल बगल वालो चौकीदारों को आवाज़ लगाई
बघवा है।
बघवा
अभी बाहर न निकलना और फिर कुछ देर बाद सारे चौकीदार आराम से सो गए । क्योंकि वो सब जानते है कि जिस क्षेत्र में बाघ गस्त करता है वहा फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हिरण नीलगाय व जंगली सुअर उस क्षेत्र से दूर भाग जाते है।
इसी लिए ये चौकीदार बाघ का बहुत सम्मान करते है। कई तो उसे पूजते भी है और भगवान मानते है । उसकी कहानी सुन कर हम लोग काफ़ी रोमांचित हो गए थे। ऐसी जाने कितने कहानियां जंगल के किनारे हर रात चलती रहती है ।







