जिम कार्बेट नेशनल पार्क हुआ 82 साल का, राजस्व के साथ बढी वन्यजीवों की संख्या

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208 बाघ, 1100 हाथी, लगभग 35 हज़ार हिरन के अलावा भालू ,साभर, गुलदार, पाडा आदि वन्य जीवों के अलावा मगरमच्छ, घड़ियाल तथा छह सौ से अधिक प्रजातियों के पक्षी भी मौजूद

रामनगर! रॉयल टाइगर के संरक्षण के रूप में सन 1936 में स्थापित जिम कार्बेट नेशनल पार्क 82वें वर्ष में प्रवेश करने वाला है। वन्यजीव संरक्षण के लिए इस पार्क ने दुनियाभर में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। प्रदेश सरकार को भी इस एतिहासिक धरोहर से इस वर्ष नौ करोड़ का राजस्व प्राप्त किया है। प्रतिवर्ष एक बाद एक कीर्तिमान स्थापित कर रहा यह पार्क पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा हैं, वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार का जरिया भी बना है।

149 वर्ष पहले वन विभाग ने ही संभाला था जिम्मा

बता दें कि इस क्षेत्र के जंगल की सुरक्षा का जिम्मा वन विभाग ने 149 साल पहले ही संभाल लिया था, यदि कार्बेट पार्क के इतिहास पर गौर करे, तो सन 1800 तक यह क्षेत्र टिहरी के नरेश की निजी संपत्ति था। गोरखाओं के आक्रमण के दौरान ईस्ट इडिया कंपनी ने टिहरी नरेश की मदद की। जिसकी एवज में यह क्षेत्र टिहरी नरेश ने अंग्रजों को सौंप दिया। सन 1858 तक इस वन क्षेत्र में अग्रेंजों का अधिपत्य रहा। तब यहा शिकार करने के लिए गोरी हुकुमत से अनुमति लेना आवश्यक होता था।

जब जंगलों का दोहन बढ़ता गया तब 1858 में इसको बचाने की कवायद शुरू की गयी। तब वन सरक्षण परियोजना को अमली जामा पहनाया गया और 1868 में पहली बार इस क्षेत्र के संरक्षण का जिम्मा वन विभाग को सौंप दिया गया। और यह क्षेत्र 1879 में आरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया गया। सन 1934 में तत्कालीन गर्वनर सर विलियम हेली ने इस क्षेत्र को वन्य जीवों के लिए संरक्षित किए जाने की वकालत की थी। जिम एडवर्ड कार्बेट को इसकी सीमाओं का निर्धारण कि ए जाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी और 8 अगस्त 1936 को यूनाइटेड प्रोविंस नेशलन पार्क एक्ट के तहत यह हैली नेशनल पार्क के रूप में यह भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अपने अस्तित्व में आया। उसके बाद इसका नाम रामगंगा नेशनल पार्क रखा गया। इस क्षेत्र के लोगों को आदम खोर बाघ से मुक्ति दिलाने वाले जिम एडवर्ड कार्बेट का 1955 में निधन होने के बाद उनकी याद में इस पार्क का राममगंगा नेशनल पार्क से 1956 में इसका नाम बदल कर जिम कार्बेट नेशनल पार्क रख दिया गया।

समय के साथ-साथ हुआ सीमा विस्तार:

शुरूआती दिनों में कार्बेट पार्क का क्षेत्र फल 323.75 वर्ग किमी था। 1966 में इसका क्षेत्रफल 520.82 वर्ग किमी किया गया। अब इसका क्षेत्रफल 1288.32 वर्ग किमी है।

वन्यजीवों की है बहुतायत:

पूरे सीटीआर में इस समय 208 बाघ, 1100 हाथी, लगभग 35 हज़ार हिरन के अलावा भालू ,साभर, गुलदार, पाडा आदि वन्य जीवों के अलावा मगरमच्छ, घड़ियाल तथा छह सौ से अधिक प्रजातियों के पक्षी भी यहा मौजूद है।

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