बाढ़ की त्रासदी में NDRF रेस्कूएर्स कोई भी कार्य अधूरा नहीं छोड़ रहे है

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NDRF समर्पण की गाथा

शाम 7 बजे हैं अंधेरा हो चला हैं। गोरखपुर, डोमिनगढ़ बाढ़ क्षेत्र मे खामोशी हो चली है। मगर 11 NDRF के जवान भूख प्यास की परवाह न करते हुए उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाको मे अब तक का सबसे बड़ा राहत, खोज व बचाव अभियान युद्ध स्तर मे छेड़े हुए है।
 बाढ़ की त्रासदी को सुनकर एक तरफ जहाँ अपने रिशतेदारों व घरवालो तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है, वही बाढ़ राहत के अभियान मे लगे 11 NDRF के जवान देश हित तथा फर्ज़ के आगे अपने परिवार को छोड़  दूसरों का दर्द दूर कर रहे है। चाहे जवान संतोष, नीरज, अजय, सुनील या दिग्विजय की बात करे, जिनके घर मे उनकी पत्नी की डीलीवरी होने वाली है और उनके घर बाढ़ मे घिरे हुएँ है। अजय का तो 7 साल का बेटा 3 दिन से अस्पताल मे भर्ती है परंतु अपने फर्ज़ का निर्वाह करते हुए छुट्टी लेने से इन्कार कर उत्तर प्रदेश के बाढ़ क्षेत्र को अपना परिवार बना लिया है। अब उनके परिवार की जिम्मेवारिया संबन्धित क्षेत्र के अधिकारी देख  रहे है ।
“आपदा सेवा सदैव” मूल मंत्र से बंधे ये जवान अपने समर्पण की महागाथा कह रहे हैं । सुबह होते ही अपनी बोट को तैयार कर, फिर पूरे दिन बाढ़ क्षेत्र मे फंसे लोगो को निकालना, राहत सामाग्री बाटना तथा वॉटर ऐम्ब्युलॅन्स के माध्यम से गाँव –गाँव दवा वितरण कर अपने जीवन को बाढ़ राहत मे  समर्पित कर दिया हैं। किसी एक आवाज मे अपनी जान की परवाह न करते हुए नदियों की विपरीत धारा मे जान बचाने की पहल की बात हो या हेलीकोप्टर से लोगो को सुरक्षित निकालने की बात हो, रेस्कूएर्स कोई भी कार्य अधूरा नहीं छोड़ रहे है। अब तो उत्तर प्रदेश निवासी भी इनके समर्पण को देखकर कहने लगे हैं कि अगर सरकारी कर्मचारी भी निष्ठा भाव से NDRF कि तरह काम करे  तो भारत जल्द ही विकसित राष्ट्र बन जाएगा।
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्य नाथ के दिशानिर्देशन मे स्थानीय प्रशाशन भी इस कार्य हेतु हर संभव मदद दे रहा है । अभी तक NDRF ने बाढ़ राहत के दौरान 1187 जाने बचाई हैं , 55793 लोगो को सुरक्षित बाहर निकाला है तथा 300 टन राहत सामाग्री बाटी है।
उत्तर प्रदेश बाढ़ त्रासदी से 15 जिले अति प्रभावित हैं, अभी तक NDRF की 28 टीमे दिन तथा रात मे भी राहत, खोज व बचाव अभियान चला रही है। श्री आलोक कुमार सिंह, कमांडेंट, 11 NDRF लगातार बाढ़ क्षेत्रो मे जमीनी सूक्ष्म आंकलन करते हुए राहत तथा बचाव कार्य की कमान खुद संभाल रखा हैं तथा NDRF के रेस्कूएर्स के कार्यो को देख उन्हे  सम्मानित व पुरस्कृत करने की घोषणा की है। जिससे NDRF रेस्कूएर्स का हौसला अपने चरम पर हैं ।

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