नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी पर पूर्ण सैन्य कब्जे की योजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। पहले प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया था कि इजरायल गाजा पर कब्जा नहीं करेगा और वहां की जिम्मेदारी एक अंतरिम शासन को सौंपी जाएगी। हालांकि, रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली सुरक्षा परिषद ने नेतन्याहू की इस योजना को मंजूरी दे दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले के लिए गुरुवार रात से शुक्रवार तड़के तक चली सुरक्षा कैबिनेट की मैराथन बैठक में चर्चा हुई। नेतन्याहू ने कहा कि उनका लक्ष्य गाजा में हमास को पूरी तरह खत्म करना और क्षेत्र को निर्शस्त्र (डिमिलिट्राइज्ड) बनाना है, जिसके बाद इसे एक नागरिक प्रशासन को सौंपा जाएगा। हालांकि, सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामीर ने चेतावनी दी है कि इस कदम से इजरायली सेना गाजा में फंस सकती है और बंधकों की जान को खतरा हो सकता है।
नेतन्याहू का ऐलान:
गाज़ा पर कब्ज़ा का इरादा नहीं है, इसे दुरुस्त करके अंतरराष्ट्रीय संस्था को सौंपा जाएगा उन्होंने कहा कि इज़राइल गाज़ा को न तो हड़पेगा, न कब्ज़ा करेगा, कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद, अभियान शुरू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सीमित समय में सैन्य कार्रवाई होगी, फिर इसे गाज़ा प्राधिकरण को सौंपा जाएगा, अंतरराष्ट्रीय संस्था की देखरेख में रखा जायेगा जिसमे न हमास रहेगा, न फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण का ज़ोर, नई व्यवस्था में बनेगा शांति का नया दौर बनेगा।
स्रोत: बेंजामिन नेतन्याहू का @CNNnews18 और @Zakka_Jacob को दिया विशेष साक्षात्कार।

इस निर्णय से गाजा में मानवीय संकट और गहराने की आशंका है, क्योंकि क्षेत्र पहले ही 22 महीनों से चल रहे युद्ध से तबाह हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और कनाडा ने इस कदम की आलोचना की है, जबकि नेतन्याहू ने इन देशों पर हमास के हमले को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
गाजा में पहले से ही इजरायली सेना का तीन-चौथाई हिस्से पर नियंत्रण है, और इस नए कदम से बाकी क्षेत्रों पर भी कब्जे की योजना है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए पूर्ण मंत्रिमंडल की मंजूरी की आवश्यकता होगी, जो संभवतः रविवार तक मिल सकती है।
यह कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है, और बंधकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। गाजा में युद्ध के कारण अब तक 61,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है, और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इजरायल अपने सैन्य अभियान को तेज करने पर अड़ा हुआ है।







